रसड़ा। सात समुंदर पार नौकरी का झांसा देकर चार युवकों को मलयेशिया भेजा गया। उन्हें भेजने का काम दिल्ली की अलजोहरा नामक एजेंसी ने किया था। सभी से एजेंट ने पांच लाख 40 हजार रुपये भी वसूल किए थे। सभी को मलयेशिया तो भेज दिया लेकिन वहां जाने के बाद चारों युवकों को बंधक बना लिया गया। काफी कोशिशों के बाद वह किसी तरह उनके चंगुल से छूटकर दिल्ली पहुंचे, जहां एजेंसी संचालक के विरुद्ध जामिया थाने में पुलिस को तहरीर दी। युवकों ने तहरीर में जो बात बताई है, वो बेहद चौंकाने वाले हैं।
कोतवाली रसड़ा के हास्पिटल रोड निवासी रमजान अली, अरशद अली, सराय निवासी हैदर अली और उत्तरपट्टी अमहर निवासी सर्फुद्दीन ने बुधवार को पुलिस को एक तहरीर दी है। इसमें बताया है कि दिल्ली के जामिया थाने में त्रिलोका पार्क स्थित अलजोहरा नामक एजेंसी संचालित है। इसका संचालन सैय्यद हाशिम और विमल वर्मा करते हैं। ये बेरागजगार युवकों को फर्जी तरीके से विदेश भेजने का काम करते हैं। इनके चंगुल में हम चारों लोग भी फंस गए। बताया कि एजेंसी संचालकों ने पासपोर्ट बनाने के नाम पर प्रत्येक व्यक्ति से एक लाख 35 हजार रुपये लिए। इस प्रकार कुल पांच लाख 40 हजार रुपये लिए। एजेंसी की ओर से हम लोगों को 25 सितंबर 2014 को दिल्ली बुलाया गया। वहां बताया गया कि मलयेशिया में सैमसंग कंपनी में काम करना है। एजेंसी ने पासपोर्ट देकर निजामुद्दीन स्टेशन से ट्रेन से चेन्नई भेजा। वहां पर एक होटल में 16 दिन तक रखा गया। उसके बाद वहां से त्रिरुपल्ली एयरपोर्ट से मलेशिया भेजा गया। वहां एजेंसी का ही बिहार प्रांत के सिवान जिला निवासी गुलाम नामक व्यक्ति मिला। उसने हम सभी को एक कमरे बंद कर दिया और जबरिया पासपोर्ट छीन लिया। कहा कि अब आजीवन यहीं पर रहना है। अन्यथा 50-50 हजार रुपये दो तो पासपोर्ट देंगे। हम सभी डर के मारे पास रखे 10-10 हजार रुपये उसे दे दिये। इस पर भी नहीं माना और रुपये की मांग करने लगे। वह हम लोगों को 10 दिनों तक बंधक बनाकर रखा। इस दौरान ठीक से ना पानी देते थे और ना ही खाना। किसी प्रकार परिवार वालों से संपर्क साधा और आपबीती सुनाई। उसके बाद परिवारवालों ने फिर से 65-65 हजार रुपये भेजे और आनलाइन टिकट की व्यवस्था की। तब जाकर हम लोगों को पासपोर्ट सौंपा। इसके बाद 31 अक्तूबर 2014 को दिल्ली पहुंचे। वहां एजेंसी संचालक के विरुद्ध जामिया थाने में तहरीर दी लेकिन सार्थक कार्रवाई नहीं होने पर मजबूर होकर चार नवंबर को रसड़ा चले आए। बताया कि यूपी और बिहार के सैकड़ों युवक वहां इनके चंगुल में फंसे हैं, लेकिन वे विवश हैं।