बलिया। लोकसभा चुनाव का बिगुल बजने के साथ प्रत्याशियों की बेचैनी बढ़ गई है। सुनसान व विरान रहने वाले गांवों के चट्टी-चौराहों पर चुनावी चर्चा परवान चढ़ने लगी है। सलेमपुर लोकसभा क्षेत्र में राजनीतिक दलों ने पत्ते खोल दिए हैं। कांग्रेस ने पिछले कई चुनाव में बहुत कम मतों के अंतर से हार का स्वाद चखने के बाद एक बार फिर डा. भोला पांडेय को मैदान में उतारा है। इस बार करो या मरो की रणनीति करते हुए कांग्रेस खोई प्रतिष्ठा को अर्जित करने की जुगत में है। चुनाव में अब मुद्दे गौड़ हो गए हैं। पार्टियां अपने प्रत्याशियों के हिसाब से जातीय आधार पर वोटों के ध्रुवीकरण में जुटी हैं।
उधर, बसपा ने भी मजबूत प्रत्याशी को मैदान में उतारा है। बसपा नेता व एमएलसी रविशंकर सिंह पप्पू भी पूरे जोश के साथ जनसंपर्क अभियान में जुट गए हैं। बसपा सर्वसमाज में अपनी पैठ का एहसास कराना शुरू कर दिया है। श्री पप्पू दलित वोट के साथ ही क्षत्रिय व अन्य वोटों को जोड़ने के प्रयास में जी जान से जुटे हैं। समाजवादी पार्टी ने सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए पूर्व सांसद हरिवंश सहाय को ही प्रत्याशी बनाया है। सहाय से पार्टी नेताओं को जीत की पूरी उम्मीद है।
भारतीय जनता पार्टी ने भी सलेमपुर सीट से दिग्गजों का टिकट काटकर काफी जद्दोजहद के बाद चार बार सांसद रह चुके सपा के स्व. हरिकेवल प्रसाद के पुत्र रविंद्र कुशवाहा को प्रत्याशी घोषित कर जातीय मतों के ध्रुवीकरण की कवायद तेज कर दी है। भाजपा की ओर से कुशवाहा बिरादरी के मतों को अपने साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त आम आदमी पार्टी चंद्रप्रताप सिंह को चुनावी समर में उतार अपनी मौजूदगी दर्ज की है। उधर, एकता मंच के घटक दलों की ओर से भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर संयुक्त रूप से प्रत्याशी घोषित हैं। छोटे-छोटे दल भी चुनाव मैदान में दमखम का प्रदर्शन करने को उत्सुक हैं।