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नकलविहीन परीक्षा को लेकर प्रशासन बना रहा उदासीन

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बलिया। बोर्ड परीक्षा को नकलविहीन कराने के लिए शासन के निर्देशों को लेकर जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग उदासीन बना रहा। खासकर केंद्र निर्धारण के दौरान भी अधिकारियों ने जिम्मेदारी से काम नहीं किया, जिससे नकलमाफियाओं के हौसले बुलंद रहे। नोडल अधिकारी व एसटीएफ की छापेमारी से जहां तैयारियों की पोल खुल गई वहीं परीक्षा समाप्ति की ओर होने के बावजूद अब तक जनपद के आला अधिकारियों का केंद्रों का निरीक्षण नहीं करना भी कई सवाल खड़े कर रहा है।
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नकलविहीन परीक्षा को लेकर शासन भले की कवायद में जुटा रहा लेकिन जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग इसको लेकर उदासीनता बरतता रहा। यही कारण है कि लाख प्रयास के बावजूद जिले में नकल पर कहीं भी कोई रोक नहीं लग सकी। नकल माफियाओं की पहुंच किस कदर है इसका अंदाजा भी बोर्ड परीक्षा के नोडल अधिकारी व दो बार के एसटीएफ की छापेमारी से हो चुका है। नोडल अधिकारी ने चार दिनों पहले भीमपुरा इलाके के तीन परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण किया तो एक केंद्र की चहारदीवारी नहीं थी और पास ही स्थित महाविद्यालय में कापियां लिखवाने का खेल किया जा रहा था। दूसरा व तीसरा परीक्षा केंद्र तो एक ही परिसर में संचालित था और दोनों स्कूल एक ही परिसर में था। इतना ही नहीं दोनों केंद्रों के सीसीटीवी कैमरे भी नहीं चल रहे थे। जबकि बोर्ड की ओर से केंद्र निर्धारण के बाद इन स्कूलों का सत्यापन कर रिपोर्ट देने को कहा था।
इसके बाद अधिकारियों ने सत्यापन में इन केंद्रों को हरी झंडी दे दी लिहाजा यह केंद्र बने। बताया जाता है इन्हीं स्कूलों के छात्र पिछले कई सालों से टॉपर में भी शुमार होते रहे हैं। इसके अलावा दो परीक्षाओं में एसटीएफ ने छापामारी कर नकल के बड़े रैकेट का खुुलासा किया लेकिन हैरानी की बात है कि इस तरह के नकल की सूचना न तो जिला प्रशासन को हुई और न ही शिक्षा विभाग के अधिकारियों व सचल दस्ते को। सूत्रों की मानें तो नकल माफियाओं के तार जिले से लेकर बोर्ड तक जुड़े हैं और वह अपनी मर्जी से हर काम कराने में सफल रहते हैं।
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