बलिया। देश में दूध का उत्पादन बढ़े और पशुपालक लाभान्वित हो, इसके लिए सरकार कई तरह की योजनाएं चला रही हैं। जिले में लक्ष्य के सापेक्ष कामधेनु की जहां तीन योजना को मंजूरी दी गई है, वहीं मिनी कामधेनु की 10 और माइक्रो कामधेनु की 14 फाइलें पास हो चुकी हैं। ऐसे में लक्ष्य के सापेक्ष काम होने के कारण निश्चित रूप से वह दिन दूर नहीं, जब जिला बलिया एक बार फिर दुग्ध उत्पादन में अव्वल होगा।
गौरतलब है कि पिछली सरकार में जो भी लक्ष्य रखा गया था, उसको पूरा करने में विभाग अक्षम साबित हुआ था। उस समय की रिपोर्ट कार्ड पर गौर फरमाएं तो क्या माइक्रो क्या मिनी, आठ-आठ फाइलें वर्ष 2014 से ही धूल फांक रही थीं। हताश पशुपालक सिर्फ विभाग और बैंक का चक्कर लगाते-लगाते थक जाते थे लेकिन योगी सरकार बनने के बाद विभाग लक्ष्य को पूरा करने में 99 प्रतिशत सफल हो चुके हैं। लक्ष्य के मुताबिक जहां तीन कामधेनु की फाइलें पास हो चुकी है। वहीं, मिनी डेरी 10 में से 10, माइक्रो डेरी के 15 में से 14 फाइलें पास हो चुकी हैं। ऐसे में विभाग की क्रियाकलापों से जहां पशुपालक खुश है, वहीं विभाग अब लक्ष्य से ज्यादा करने की फिराक में है, जो पशुपालकों के लिए हितकारी है।
बैंकिंग एक्ट 143 उद्योग में डालते हैं रोड़ा
बलिया। जहां सरकार किसानों एवं बड़े काश्तकारों को डेरी उद्योग में प्रोत्साहित करने के लिए तरह-तरह की योजनाएं चला रही है, वहीं बैंक के कायदे-कानून में कई फाइलें बीच में ही दम तोड़ देती हैं। जिससे अक्सर सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन धरातल पर हो नहीं पाता है। बैंकिंग एक्ट 143 के तहत कृषि योग्य भूमि में आप किसी प्रकार का उद्योग लगा नहीं सकते हैं। जबकि संबंधित के पास परती व बंजर जमीन उपलब्ध ही नहीं रहती है। ऐसे में बैंकिंग नियम कानून के पेंच में अक्सर योजना दम तोड़ देती है।
डेयरी योजना को लेकर लक्ष्य के सापेक्ष काम पूरा हो चुका है। विभाग के कर्मचारियों की तत्परता से आज एक फाइल छोड़कर उद्योग की सारी फाइलें पास हो चुकी है। डेयरी के प्रति भी किसानों का रुझान बढ़ा है। - डा. विजय प्रताप सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी