बलिया। शहर की सीवर से दूषित हो रही गंगा सालिड वेस्ट मैनजमेंट का इंतजाम नहीं होने से भी प्रभावित हो रही है। प्रतिदिन शहर से 20 से 25 टन निकलने वाला कचरा गंगा किनारे डंप किया जा रहा। नाले-नालियों के जरिये भी पॉलिथीन और सूखा कचरा गंगा में पहुंच कर इसे दूषित कर रहा। इससे पानी में कूड़ा कचरा उतराया रहता है, जिसकी कभी सफाई भी नहीं कराई जाती है। सालिड वेस्ट मैनजमेंट नहीं होने से लोग पॉलिथीन में कचरा भरकर भी कई प्रकार की सामग्री गंगा में फेंक दे रहे। जो नदी की तलहटी में जाकर जम जा रहा। जबकि यहां के लोग इसके परिणाम से अनजान हैं, अनजाने में ही गंगा को दूषित करने में सहयोग कर रहे। ऐसे में जागरूकता अभियान से लोगों को सचेत बनाया जा सकता है। शहर में प्रतिदिन 20 से 25 टन कूड़ा कचरा निकलता है, जिसे नगर पालिका द्वारा नदी के किनारे खाली जगह पर डंप किया जा रहा है। इस तरह से देखा जाए तो माह में छह सौ से साढ़े सात सौ टन कचरा प्रति माह निकल रहा है, जिसे बिना ट्रिटमेंट किए ही शहर के बाहर नदी के किनारे इलाके में डंप कर दिया जाता है। गंगा नदी के किनारे के इलाकों में शहर का कूड़ा कचरा डंप किया जाना भी खतरनाक साबित हो रहा है। आसपास के इलाकों में कूड़ा कचरा से निकलती दुर्गंध से सांस लेना दूभर हो गया है। बारिश के दिनों में यही कचरा पानी में बह कर चला जा रहा। शहर के नाले-नालियों के जरिए मल मूत्र के साथ पॉलिथीन और अन्य प्रकार का कचरा गंगा में जाता है, लेकिन इसके लिए अभी तक कारगर उपाय नहीं किए गए। शहर के बीचोंबीच से होकर गुजरने वाला कटहर नाले की स्थिति भी कमोबेश ऐसी ही है। नाले की सफाई नहीं होने से प्लास्टिक और कूड़ा कचरा से पट गया है। अशोक कुमार गुप्ता, सदस्य, गंगा सेवा समिति, बलिया ने कहा कि गंगा नदी में कटहर नाले का गंदा पानी गिराए जाने पर हर हाल में रोक लगनी चाहिए। इसके लिए जिला प्रशासन का कई बार ध्यान आकृष्ट कराया जा चुका है। गंगा को दूषित होने से बचाना सभी का कर्तव्य है। इसके लिए शासन को सख्त निर्णय लेने की जरूरत है, साथ ही शहर का कूड़ा जो इन दिनों बिना ट्रीटमेंट किए ही गंगा के किनारे के इलाके में डंप किया जा रहा है, उस पर भी तत्काल प्रभाव से रोक लगनी चाहिए।