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मानदेय की आस में हजारों संविदाकर्मी

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बलिया। जनपद के विभिन्न विभागों में सालों से अलग-अलग पदों पर संविदाकर्मियों को तैनात किया गया है। हालांकि कुछ पदों पर तो संविदाकर्मियों को समय से मानदेय का भुगतान कर दिया जाता है लेकिन अधिकांश विभागों के संविदाकर्मियों को मानदेय के लिए तरसना पड़ता है। आए दिन किसी न किसी विभाग के संविदाकर्मियों का आंदोलन भी मानदेय भुगतान को लेकर किया जाता है।
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जिले में कुल 10 हजार 800 कर्मचारी बतौर संविदा अलग-अलग विभागों में पिछले कई सालों से कार्यरत हैं। इसमें डीआरडीए में रोजगार सेवक, तकनीकी सहायक, कम्प्यूटर ऑपरेटर आदि के अलावा स्वास्थ्य विभाग में चिकित्सक, आशा संगिनी के साथ ही विभिन्न विभागों में कम्प्यूटर ऑपरेटर आदि हैं। बताया जाता है कि वर्ष 2015-16 में सरकार की ओर से संविदाकर्मियों की भर्ती के नियमों बदलाव कर दिया और एनजीओ के माध्यम से कर्मियों को विभिन्न विभागों में रखा गया। लेकिन मानदेय भुगतान को लेकर हमेशा संविदाकर्मियों को महीनों तक इंतजार करना पड़ता है। वर्तमान में डीआरडीए के मनरेगाकर्मी पिछले एक साल से मानदेय भुगतान को लेकर जूझ रहे हैं। खासकर 723 रोजगार सेवक आए दिन मानदेय भुगतान को लेकर आंदोलन करते हैं। रोजगार सेवक संघ के जिलाध्यक्ष बब्बन चौधरी की मानें तो कभी भी हर महीने मानदेय का भुगतान नहीं किया जाता है और महीनों आंदोलन के बाद ही मानदेय खाते में भेजा जाता है। उधर, आशा संगिनियों को हर महीने पांच हजार 450 रुपये भुगतान का प्रावधान है लेकिन विभाग की ओर से केवल पांच हजार ही भुगतान किया गया है। इसको लेकर आशा संगिनियों ने भी आंदोलन की चेतावनी दी है। आशा संघ की जिलाध्यक्ष पूनम पांडेय ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग में बजट होने के बाजवूद आशा बहुओं का पावना तथा आशा संगिनियों के मानदेय भुगतान में हीलाहवाली और धांधली की जाती है। एक एनजीओ की ओर से स्वास्थ्य विभाग में तैनात बीपीएम आदि का भुगतान भी तब हुआ तब उन्होंने डीएम को ज्ञापन सौंपा, जबकि विभाग की ओर से संस्था को कर्मियों के सापेक्ष पूरा पैसा दे दिया गया था। यह तो महज उदाहरण हैं, जिले के अधिकांश विभागों में संविदाकर्मियों को मानदेय के लिए तरसना पड़ता है जबकि अधिकांश विभागों में बजट की उपलब्धता रहती है। डीआरडीए के पीडी आरके त्रिपाठी की मानें तो मनरेगाकर्मियों के भुगतान के लिए समय-समय पर शासन से बजट की मांग की जाती है और बजट मिलने पर उनका भुगतान किया जाता है।
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