बलिया/धर्मापुर। अमर उजाला में शीर्षक ‘ भटकती हुई लड़की कुछ न बोल सकी’ छपने के बाद पांच वर्षीय अनामिका को उसके मम्मी-पापा तो मिल गए। लेकिन रहस्यमयी ढंग से उसका गाजीपुर कस्बा से बलिया आ जाना कई सवाल खड़े कर रहा है। अनामिका के पिता ओमप्रकाश के मुताबिक वे अपनी बच्ची को अपने घर से स्कूल जाने के लिए वाहन पर छोड़ा था। बच्ची गाजीपुर नोनहरा कल् चेहन्नम भारत अकादमी की छात्रा है। इसके बाद शनिवार को बच्ची चितबड़ागांव के धर्मापुर चट्टी पर भटकती हुई मिली, जहां दुकानदारों द्वारा जब उससे उसका नाम, गांव पूछा गया तो बच्ची कुछ भी बोलने में असमर्थ थी। ऐसे में गांव के प्रधान मुनिब राजभर ने बच्ची को सहारा दिया। रविवार को अमर उजाला में खबर प्रकाशित होते ही ढूंढते-ढूंढते ओमप्रकाश सीधे अपने गांव से बलिया प्रधान के यहां आ धमके और अपनी खोई बच्ची को पाकर गले लगा लिए। अमर उजाला से हुई बातचीत में गांव के प्रधान ने बताया कि बच्ची को उसके पापा को सौंप दिया गया है। बच्ची के पिता का कथन था कि उसकी बच्ची स्कूल से गायब हुई है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब स्कूल से गायब हुई उस वक्त वाहन चालक और कंडक्टर कहां थे, यह सरासर स्कूल प्रशासन की लापरवाही है। बच्ची के साथ कुछ भी हो सकती थी!