बलिया। वसुंधरा मार्केट में देर रात लगी आग को काबू करने में अग्निशमन विभाग एवं पुलिस महकमा को काफी मशक्कत करनी पड़ी। इसकी वजह मार्केट के निर्माण में मानक की पूरी तरह से अनदेखी की है। मार्केट में संचालित दुकानें इस कदर संकरे है कि वेंटिलेशन तक की व्यवस्था नहीं है। वहीं कटरे के अंदर जाने और आने के लिए मात्र तीन से चार फीट का ही रास्ता है। सबसे बड़ी बात यह है कि जिस मार्केट में दर्जन से अधिक दुकानें है, उसमें एनओसी लेना तो दूर एक भी दुकानदार के पास अग्निशमन यंत्र तक नहीं है।
जिस मार्केट में शुक्रवार की देर रात अगलगी घटना घटित हुई, उस मार्केट के निर्माण में खुलेआम मानक की धज्जियां उड़ाई गई हैं। मार्केट में कुल 22 दुकानों का निर्माण किया गया है। लेकिन कटरे में आनेजाने का रास्ता मात्र तीन से चार फीट का है। कटरे से बाहर निकलने के लिए दो गेट है। जिसमें एक उत्तर दिशा व दूसरा दक्षिण दिशा में है। जबकि प्रथम तल पर जाने के लिए मात्र एक सीढ़ी है। यहां तक कि कटरे के निर्माण के बाद अग्निशमन विभाग से एनओसी तक नहीं लिया गया है। जबकि एनओसी लेना अनिवार्य है। सबसे बड़ी बात यह है कि कटरे में स्थित किसी भी दुकानदार के पास अग्निशमन यंत्र तक नहीं है। जिसका खामियाजा शुक्रवार की रात लगी आग में भुगतने को मिला। अगर अग्निशमन यंत्र होता तो कटरे के एक दुकान में लगी आग पर तत्काल काबू पाया जा सकता था। इसमें अग्निशमन विभाग की भी उदासीनता उजागर हो रही है।