बलिया। तीन साल बाद भी जिले में 1700 पीएम आवास का निर्माण का कार्य पूरा नहीं हो सका है। जबकि इसके निर्माण को पूरा करने के लिए सरकार ने 31 मार्च की समय सीमा निर्धारित की थी।
सरकार की प्राथमिकताओं में प्रधानमंत्री आवास योजना है ताकि गरीब परिवारों को छत मुहैया करायी जा सके। लेकिन तीन साल बाद भी यह योजना धरातल पर पूरी तरह नहीं उतर सकी। वर्ष 2015-16 में भारत सरकार ने पूर्व से संचालित इंदिरा आवास का नाम बदल कर प्रधानमंत्री आवास योजना कर दिया और इसके चयन की प्रक्रियाओं में भी बदलाव किया। योजना को वर्ष 2016-17 में लागू किया गया। सरकार की ओर से जिले के लिए वर्ष 2016-17 में 9810 आवास का लक्ष्य निर्धारित करते हुए धनराशि भी उपलब्ध कराई लेकिन एक भी आवास का आवंटन नहीं हो सका। अधिकारियों की मानें तो लक्ष्य का निर्धारण काफी विलंब से किया गया और इसी बीच विधानसभा चुनाव होने के कारण आवंटन का कार्य बाधित हुआ। इसके बाद सरकार ने वर्ष 2017-18 में जिले के लिए 4631 आवासों का लक्ष्य निर्धारित करते हुए धनराशि मुहैया कराई। वर्ष 2017-18 में कुल 14 हजार 441 आवासों का आवंटन किया गया लेकिन इसके निर्माण की गति काफी धीमी रही। इसको देखते हुए शासन की ओर से सख्त रवैया भी अपनाया गया और अधिकारियों को धनराशि लेने के बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं करने पर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का निर्देश दिया। इसके अलावा लापरवाही बरतने वाले कर्मियों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कराने का निर्देश देते हुए 31 मार्च तक हर हाल में आवास निर्माण कार्य पूरा करने को कहा। लेकिन अभी भी 1700 पीएम आवास का निर्माण का कार्य पूरा नहीं हो सका है। बताया जाता है कि ब्लॉक व ग्राम स्तरीय कर्मियों की उदासीनता के कारण पीएम आवास का निर्माण जोर नहीं पकड़ रहा है।