रतसर । जनऊपुर में छठ पर आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में व्यास गद्दी से पं0 अभिषेक शास्त्री ने कथावाचन करते हुए कहा कि भागवत अवसाद दूर करने का उत्तम ग्रंथ है। भागवत श्रवण करने वाला कभी दु:खी नही होता है। भगवान शिव ने सुखदेव बनकर सारे संसार को भागवत कथा सुनाई। श्रोताओं को कर्मों का सार बताते हुए कहा कि अच्छे और बूरे कर्मों का फल भुगतना ही पड़ता है।
उन्होंने भीष्म पितामह का उदाहरण देते हुए कहा कि पितामह छ: महीने तक वाणों की शैय्या पर लेटे रहे। जब वो वाणों की शैय्या पर लेटे थे तब वो सोच रहे थे कि मैने कौन सा पाप किया है कि वाणों की शैय्या पर लेटना पड़ा है और प्राण नही निकल रहे है तब भगवान कृष्ण ने भीष्म पितामह से कहा कि आप अपने पुराने जन्मों को याद करे और सोचे कि आपने कौन सा पाप किया है। भीष्म पितामह बहुत ज्ञानी थे उन्होनें कृष्ण से कहा कि मैने पिछले जन्म में रत्ती भर पाप नही किया है उस पर कृष्ण ने उन्हें बताया कि पिछले जन्म में आप राजकुमार थे और घोड़े पर सवार हो कर जा रहे थे कि उसी दौरान आपने एक नाग को जमीन से उठाकर कांटो पर फेंक दिया था छ: महीने तक उसके प्राण नही निकले थे उसी कर्म का फल है जो आप छ: महीने से वाणों की शैय्या पर लेटे है। इसका मतलब है कि कर्म का फल सभी को भुगतना होता है।
कहा कि कलयुग में कथा का आश्रय़ ही सच्चा सुख प्रदान करता है। कथा श्रवण करने से दु:ख और पाप मिट जाते है। सभी दु:खो की एक ही औषधि भागवत कथा है। कथा के मुख्य यजमान पं. बरमेश्वर पाण्डेय, आचार्य पं. मुनिराम तिवारी, पं. भोलानाथ पाण्डेय, पं. मृत्युन्ज्य पाण्डेय, चुन्नू पाण्डेय, धनेश कुमार पाण्डेय, करीमन राम जे ईं. सहित सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।