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देश प्रेम तीर्थ बलिया का गौरवशाली रहा है इतिहास: इंद्रेश

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बलिया। शेर-ए बलिया चित्तू पांडेय और बलिया को भुलाया नहीं जा सकता। आज हम संकल्प लें कि इस तीर्थ स्थान को स्वच्छ बनाकर अन्य जनपदों के लिए नजीर पेश करें। तभी चित्तू पांडेय का सपना साकार होगा। यह बातें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राष्ट्रीय चिंतक इंद्रेश कुमार ने 1942 के क्रांतिकारी व जनपद के प्रथम जिलाधिकारी चित्तू पांडेय की जयंती पर नगर के टाउन हाल में आयोजित विचार गोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि के रूप में कही। गोष्ठी का शुभारंभ मुख्य अतिथि व सांसद भरत सिंह ने संयुक्त रूप से उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया।
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इंद्रेश कुमार ने कहा कि बेटा-बेटी में भेद करके राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा से नहीं जोड़ सकते। उन्होंने उपस्थित लोगों से अपील की कि चित्तू पांडेय की जयंती पर संकल्प लें कि बलिया को ऐसा स्वच्छ बनाएं ताकि लोग बलिया को देखने के लिए बाध्य हो जाएं। टाउन हाल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के राष्ट्रीय चिंतक इंद्रेश कुमार ने शेर-ए बलिया चित्तू पांडेय स्मारक समिति द्वारा प्रकाशित स्मारिका 1942 का आंदोलन और शेर-ए बलिया चित्तू पांडेय तथा राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका पुस्तक का विमोचन भी किया। इस अवसर पर सांसद भरत सिंह, राज्य सभा सांसद सकलदीप राजभर, भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह, पूर्व विधायक रामइकबाल सिंह, सेनानी डॉ. रामविचार पांडेय ने अपना विचार रखा।
उधर, चित्तू पांडेय की जयंती पर जिला कांग्रेस कमेटी के सभागार में कांग्रेसियों ने श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया । उनके व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डाला। कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने कहा कि चित्तू पांडेय के नेतृत्व में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ छेड़ी गई जंग में बलिया को 19 अगस्त 1942 को आजाद होने का गौरव प्राप्त हुुआ। इसी तरह से भोजपुरिया आर्थिक संघ व डॉ राम मनोहर लोहिया नव स्मृति संस्थान के संयुक्त तत्वाधान में नगवां में शेर-ए बलिया चित्तू पांडेय की जयंती पर परिचर्चा का आयोजन किया गया।
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