बलिया। दुबहड़ ब्लॉक में रोजगार सेवकों के मानदेय गोलमाल की जांच में अधिकारी लीपापोती में जुटे हैं। 12 दिनों बाद भी रिपोर्ट तैयार नहीं हो सकी है। शासन के निर्देश पर मनरेगा उपायुक्त ने बीडीओ से रिपोर्ट मांगी है।
मनरेगा आयुक्त के निर्देश पर दुबहड़ ब्लॉक में मनरेगा के तहत कार्यरत रोजगार सेवकों के मानदेय भुगतान की जांच 12 दिनों पहले शुरू हुई थी। श्रम एवं रोजगार मनरेगा उपायुक्त ने ब्लॉक पर जाकर पत्रावलियों को खंगाला था और रोजगार सेवकों की संख्या व मानदेय भुगतान के बाबत बीडीओ से रिपोर्ट मांगी थी। लेकिन 12 दिनों बाद भी जांच पूरी नहीं हो सकी है।
बताया जाता है कि अमर उजाला के खुलासा को आधार बनाते हुए रोजगार सेवक लक्ष्मण प्रसाद आदि ने मनरेगा आयुक्त को शिकायती पत्र भेज कर बताया था कि पिछले कई सालों से रोजगार सेवकों के मानदेय में गोलमाल किया जा रहा है। इसकी जांच तो शुुरू हुई लेकिन अभी तक रोजगार सेवकों की संख्या की पुष्टि ब्लॉक स्तरीय अधिकारी नहीं कर सके हैं। सूत्रों की मानें तो दुबहड़ ब्लाक में एक जनवरी 2012 से 31 मार्च 2014 तक कुल 39 रोजगार सेवकों के मानदेय भुगतान के लिए शासन को डिमांड भेजा गया है और शासन से मिली राशि 11.85 लाख को 40 रोजगार सेवकों को भुगतान किया गया है। इसके अलावा भी हर साल रोजगार सेवकों की संख्या में हेर-फेर कर लाखों की धनराशि का गोलमाल किया गया है। कयास लगाए जा रहे हैं कि इस गोलमाल में गर्दन बचाने के लिए जांच को रफ्तार नहीं दी जा रही है मामले में लीपापोती करने का प्रयास किया जा रहा है।