बैरिया। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सोनबरसा तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सकों व कर्मचारियों का आवास जर्जर हो चुका है। आलम यह है कि आवासीय सुविधाओं के अभाव में शाम चार बजे के बाद प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र कोटवां के चिकित्सक जिला मुख्यालय चले जाते है। इससे मरीज और तीमारदारों के सामने परेशानी हो गई है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सोनबरसा के जर्जर आवास में डाक्टर व कर्मचारी गुजारा करने के लिए मजबूर है। सीएचसी सोनबरसा के स्वास्थ्य कर्मियों के आवास का आलम यह है कि छत का प्लास्टर टूट कर फर्स पर गिरता रहता है। कर्मचारियों के आवास का खिड़की व दरवाजे टूट चुके है यहां तक कि पीने के लिए शुद्ध पानी तक कि व्यवस्था नहीं है। वहीं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र कोटवा पर चिकित्सकों व कर्मचारियों के रहने वाला आवास खण्डहर बन चुका है। चिकित्सक जिला मुख्यालय से सुबह 11 बजे तक पीएचसी कोटवा पहुंचते है और दो बजेे ही स्टेशन के तरफ ट्रेन पकड़ने के लिए चले जाते है। चिकित्सकों के चले जाने पर मरीजों तथा तीमारदारों को इलाज के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। जबकि दो दशक पहले यहां गम्भीर बीमारियों वाले मरीजों को भर्ती कर रात-रात भर इलाज किया जाता था।
इस बाबत सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के अधीक्षक विजय कुमार यादव ने बताया कि स्वास्थ्यकर्मियों का आवास जर्जर होने के संबंध में कई बार उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। लेकिन आज तक इस मामले पर उच्चाधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। जबकि प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र कोटवां के प्रभारी चिकित्साधिकारी देवनीति सिंह ने कहा कि यहां के आवास खंडहर के रुप में तब्दील हो चुका है। ऐसे में चिकित्सक जिला मुख्यालय रहने के लिए चले जाते है। पीएचसी कोटवा पर सुबह दस से चार बजे तक चिकित्सक सेवा देते है।