बलिया। शासन ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में वर्षों से जमे 46 लिपिकों का सामूहिक स्थानांतरण गैर जनपद कर दिया है। जबकि शासन ने अपने चहेते प्रधान लिपिक दयाशंकर वर्मा को यही पर दोबारा नियुक्त कर दिया है। हालांकि दयाशंकर वर्मा का मुकदमा हाई कोर्ट में विचाराधीन है। यही नहीं जिला अस्पताल और महिला अस्पताल में वर्षों से जमे लिपिकों को शासन ने छुआ तक नहीं शासन के सौतेले व्यवहार से स्वास्थ्य महकमा में हड़कंप मचा है।
मुख्य चिकित्साधिकारी, जिला अस्पताल तथा जिला महिला चिकित्सालय में दो दशक से अधिक समय से बाबू अपना-अपना जुगाड़ लगाकर जमे हुए है। इसमें से शासन ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के 46 बाबुओं का सामूहिक स्थानांतरण शनिवार को गैर जनपदों गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, देवरिया, चंदौली, बहराइच, गोंडा, हमीरपुर, पीलीभीत, बस्ती, इलाहाबाद, संत कबीरनगर, मैनपुरी, राय बरेली, इटावा, रामपुर, गोरखपुर, लखीमपुर खीरी आदि स्थानों पर किया है। लेकिन जिला अस्पताल तथा जिला महिला चिकित्सालय में दशकों से जमे बाबुओं को छुआ तक नहीं है। इसे लेकर शासन पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। यही नहीं शासन ने अपने चहेते व चर्चित वरिष्ठ बाबू दयाशंकर वर्मा को दोबारा मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में तैनात किया है। इससे पहले वह देवरिया में तैनात था। जबकि इस पर पहले से ही कई मुकदमों के साथ वर्तमान में भी हाईकोर्ट में वाद चल रहा है। यहां तक की बाबू की नियुक्ति तक को पूर्व की जांच में फर्जी बताया गया है।