बलिया/जयप्रकाशनगर/लालगंज। घाघरा नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि होने के कारण क्षेत्र के ग्राम पंचायत चांददियर की करीब 10 हजार की आबादी बुधवार को बाढ़ की चपेट में आ गई। घाघरा नदी के बाढ़ की स्थिति को देखते हुए आशंका जताई रही है गुरुवार तक इन ग्राम पंचायत के निवासियों के आवागमन का रास्ता पूरी तरह से घाघरा के पानी से डूब जाएगा। वहीं इन गांवों के बाशिंदे अब अपना घर छोड़कर मवेशियों के साथ पुरानी रेलवे लाइन पर शरण लेना शुरू कर दिए हैं। जबकि जिला प्रशासन की ओर से राहत के नाम पर ग्राम पंचायत के एक पूरवे के लिए एक छोटी नाव आवागमन के लिए उपलब्ध कराई गई है। उधर लालगंज में गंगा नदी के तेज बढ़ाव और कटान से घरों तक नदी के पहुंच जाने से घबराए ग्रामीण अपना घरौंदा स्वयं उजाड़ने में जुटे हैं।
मंगलवार की सुबह जयप्रकाशनगर में टोला फतेहराय गांव में ग्रामीणों के आवागमन के लिए एक मात्र जो संपर्क मार्ग बचा था उसे भी बाढ़ के पानी ने अपने चपेट में लेना शुरू कर दिया। सूचना पर पहुंचे ग्राम प्रधान प्रतिनिधि वीरेंद्र यादव ने संपर्क मार्ग के किनारे मिट्टी डलवाकर बाढ़ के पानी को रोकने का प्रयास किया। बताया कि यदि घाघरा में बढ़ाव की स्थिति जारी रही तो संपर्क मार्ग सहित चांददियर पंचायत के पूरवा पलटू नगर, अगनू के डेरा, श्रीपालपुर के डेरा, चांददियर, यादव नगर, टोला फतेहराय, बैजनाथ के डेरा, बकुल्हा, बकुल्हा पूर्वी आदि गांव बाढ़ की चपेट में आए जाएंगे। वहीं गंगा के किनारे बसे गांव कोड़रहा नौबरार पंचायत का भगवान टोला टिपुरी गांव करीब एक सप्ताह से पूरी तरह बाढ़ के घेरे में आ चुका है। इस गांव के ग्रामीणों को राहत के नाम पर अब तक जिला प्रशासन की ओर से कोई राहत या संसाधन मुहैया नहीं कराया गया है।
रेवती। घाघरा के बढ़ने का क्रम जारी है। बुधवार की सुबह चांदपुर गेज पर नदी 59.19 मीटर पर थी। नवका गांव के ग्रामीण दुर्दशा झेलने को मजबूर हैं। पशुओं के चारे का अभाव भी हो गया है। गांव के अंदर भी पानी ने पैठ बना लिया है। ऐसे में धर्मनाथ यादव, शिव बचन, दीनानाथ, कमलेश यादव सहित दर्जनों लोग परिवार सहित अपने घरों को छोड़कर टीएस बंधा या रिश्तेदारों के यहां शरण लेने को बध्य हैं। प्रधान प्रतिनिधि प्रदीप पासवान ने बताया कि प्रति वर्ष इतना पानी बढ़ने पर छह नावें लगाई जाती थी लेकिन इस बार अब तक गांव में मात्र तीन नावें ही लगी हुई हैं। उधर, रामपुर मसरिख एवं लखदीयरी गांव के कटान विस्थापित लोगों के सौ से अधिक डेरे नदी के द्वारा छोड़ी गई मिट्टी पर बसे हैं। कलावती पत्नी धनजी यादव ने बताया कि सामानों को लाने ले जाने के लिए सरकारी नावों की अति आवश्यकता है। नावों की व्यवस्था नहीं होने से बड़ी कठिनाईयां हो रही हैं।
लालगंज। गंगा नदी के तेज बढ़ाव और कटान से घरों तक नदी के पहुंच जाने से घबराए ग्रामीण अपना घरौंदा स्वयं उजाड़ने में जुटे हैं। वहीं सौ वर्ष पुराना शिव मंदिर का अस्तित्व भी खतरे में पड़ गया है। दर्जनों घरों के वाशिंदों की नींद उड़ी हुई है। पानी का बढ़ाव इसी तरह रहा तो क्षेत्र में गंगा नदी का बाढ़ क्षेत्र में आना लगभग तय माना जा रहा है।
गंगा नदी बढ़ाव पर है । दोकटी थाना क्षेत्र के जगदीशपुर गांव में गंगा नदी रामायण पांडेय के दीवार से टकराने लगी है। ऐसे में यह परिवार अपना आशियाना स्वयं ही उजाड़ने में लगा हुआ है। साथ ही ईंट, करकट आदि सामानों को व्यवस्थित करने में लगे हैं। सौ वर्षों से भी अधिक पुराना जगदीशपुर गांव के शिव मंदिर का नीचे का एक भाग भी फट गया है जिससे कि किसी भी समय मंदिर कटान की भेंट चढ़ सकता है। हालांकि ग्रामीणों के द्वारा बोरियों में मिट्टी व बालू भरकर मंदिर को बचाने का काम किया जा रहा है पर बच पाना संभव नहीं दिख रहा है। गांव के लोग पानी बढ़ने से लेकर घटने के समय तक दहशत में है। जगदीश पुर गांव के निवासी 80 वर्षीय बैजनाथ पांडेय बताते हैं कि नदी का बढ़ाव या घटाव दोनों ही स्थिति में कटान का भय बना रहता है। गांव के लोग रात भर सो नहीं पाते हैं। वर्तमान की तरह यदि पानी का बढ़ाव इसी तरह से होता रहा तो क्षेत्र के गड़ेरिया, नरदरा, शिवपुर कपूर दियर सहित दर्जनों गांव पानी से घिर जाएंगे।
बैरिया। जिलाधिकारी भवानी सिंह खंगारौत ने तहसील प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग के साथ बुधवार को नाव के सहारे उत्तरी दियरांचल के गोपालनगर, बशिष्ठनगर, मानगढ़, शिवाल का दौरा किया। उन्होंने बाढ़ पीड़ितों में प्रतिदिन दो हजार भोजन के पैकेट वितरण करने का निर्देश दिया। डीएम के निर्देश पर सभी 16 चौकियों पर संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों को 24 घंटे तैनात रहने का निर्देश दिया गया। उत्तरी दियरांचल के चार बाढ़ चौकियों पर चार पशुओं के चिकित्सक व चार स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सकों की तैनाती का आदेश दिया।
स्वास्थ्य विभाग को क्लोरीन की गोलियां बांटने का भी निर्देश दिया। कहा कि 15 दिन बाढ़ के लिए महत्वपूर्ण है। वहीं दियरांचल के लोगों को आवागमन के लिए कुल 21 नाव उपलब्ध करा दिया गया है। जबकि सबसे अधिक प्रभावित गांव गोपालनगर टांड़ी, बशिष्ठनगर के धुपनाथ के डेरा, बैजनाथ के डेरा में कुल एक हजार खाद्य सामग्री का पैकेट छह सितंबर की सुबह तक बंटवाने का निदेश दिया। डीएम ने तहसीलदार गुलाब चंद्रा को हर रोज दो हजार खाद्य पैकेट चार से पांच दिनों तक बशिष्ठनगर से लेकर इब्राहिमाबाद नौबरार तक बाढ़ पीड़ितों के बीच वितरित कराने का निर्देश दिया। इस मौके पर सीएमओ डा. एसपी राय, सीवीओ डॉ. अशोक मिश्र, एसडीएम बैरिया लालबाबू दुबे, तहसीलदार बैरिया गुलाब चंद्रा, एसएचओ बैरिया गगनराज सिंह आदि रहे। डीएम ने बताया कि गुरुवार को प्राथमिक विद्यालय गोपालनगर के प्रांगण में प्रभारी मंत्री के हाथों बाढ़ राहत खाद्य सामग्री का पैकेट वितरण करवाया जाएगा। खाद्य सामग्री के पैकेट में 10 किग्रा आटा, एक लीटर मिट्टी तेल, चावल, दाल, माचिस, बिस्कुट आदि होगा। डीएम ने बाढ़ से बर्बाद हुए फसलों का भी आंकलन कर रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश तहसील प्रशासन को दिया।