बेल्थरारोड/बैरिया (बलिया)। उफ़नाई घाघरा नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव का सिलसिला जारी है। दियारांचल के प्रभावित गांवों में छह से ज्यादा गांवों में शुद्ध पानी और राशन की दिक्कत होने लगी है। पशुओं के लिए चारा और संक्रमण का ग्रामीणों को डर सता हरा। बैरिया इलाके में तहसीलदार व लेखपालों की टीम ने दियरांचल के गोपालनगर, वशिष्ठ नगर, झरकठहा पूर्वी, नौकागांव, मानगढ़ व शिवाल का भ्रमण किया। संक्रमण को देखते हुए चिकित्सकोें की टीम प्रभावित इलाकों में जाकर लोगों और पशुओं की जांच कर दवा इलाज करेगी। पशु चिकित्सक को गोपालनगर टांड़ी में पशुओं के इलाज के लिए लगाया गया है। तहसीलदार ने राशन दुकानदार को गोपालनगर में मिट्टी तेल वितरण करने का आदेश दिया। आम लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए चिकित्सकों की तैनाती के लिए जिलाधिकारी से वार्ता की और डीएम के निर्देश पर सीएमओ ने स्वास्थ्य विभाग के मोबाइल टीम को उत्तरी दियरांचल के बाढ़ क्षेत्र में जाने का निर्देश दिया।
बता दें कि लाल निशान से आधा मीटर ऊपर बहने वाली नदी के तेवर तल्ख हैं। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार मंगलवार को सुबह जल स्तर 64.57 मीटर पर स्थित हो गया जो शाम तक जारी रहा, जबकि लाल निशान 64.01 से 56 सेंटीमीटर ऊपर जलस्तर में कभी स्थिरता तो कभी उतार-चढ़ाव का क्रम बना हुआ है। आयोग ने अगले 24 घंटे के दौरान जल स्तर में मामूली कमी के होने का पूर्वानुमान किया है। उधर बैरिया में घाघरा नदी का जलस्तर मंगलवार को स्थिर रहा लेकिन इलाके के गांवों में बाढ़ का पानी अभी भी जमा हुआ है। बाढ़ को लेकर दियरांचल के लोग सहमे हुए हैं। मंगलवार को तहसीलदार बैरिया गुलाब चंद्रा ने लेखपालों की टीम के साथ विभिन्न गांवों का भ्रमण कर बाढ़ पीड़ितों को राहत देने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया।
बेल्थरारोड संवाददाता के अनुसार चैनपुर गुलौरा और मठिया क्षेत्र के डेंजर जोन में बसी आबादी बाढ़ को लेकर परेशान है। टीएस बंधे पर पानी पहुंच गया है। सैकड़ों एकड़ फसल बर्बाद हो गई है। इसको लेकर किसान चिंतित हैं। केंद्रीय जल आयोग की मानें तो जल स्तर में कमी और स्थिरता के बाद से बाढ़ की आशंका फिलहाल टल गई है, लेकिन नदी के मिजाज में परिवर्तन को लेकर तटवर्ती दर्जनों गांव के हजारों लोग सहम गए हैं।
बैरिया संवाददाता के अनुसार तिलापुर डेंजर जोन के आसपास के ग्रामीणों की मांग पर तहसीलदार ने बाढ़ विभाग के एई व जेई को रात्रि के समय बंधे पर प्रकाश की व्यवस्था कराने का निर्देश दिया। जबकि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सोनबरसा के अधीक्षक विजय यादव को संक्रामक बीमारियों से बाढ़ पीड़ितों के बचाव के लिए ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराने को कहा। तहसीलदार ने बताया कि दियरांचल के लोगों ने शिकायत की थी कि चार-पांच दिनों से बिजली की आपूर्ति ठप है और मिट्टी तेल नहीं होने से लोग अंधेरे में हैं। इसे देखते हुए पूर्ति निरीक्षक को तेल वितरण कराने का निर्देश दिया है। बताया कि बाढ़ की वजह से कई प्राथमिक विद्यालय बंद हैं। इस बाबत बीएसए को जहां सुरक्षित जगह मिले वहां बच्चों को पढ़ाने की व्यवस्था करने व मिड-डे मील देने को कहा गया है। इस मौके पर लेखपाल मोतीलाल गुप्ता, राधेश्याम वर्मा, राजीव कुमार गिरी, चंदन सिंह, ज्योति गुप्ता के अलावा प्रधान प्रदीप यादव, हेमनाथ यादव, उमाशंकर सिंह, पूर्व प्रधान बच्चा यादव आदि रहे।
रामगढ़। घाघरा के बाद अब गंगा का जलस्तर मंगलवार को लाल निशान के पार पहुंच गया। खतरा निशान 57.615 है, वहीं जलस्तर 57.70 मी. पर पहुंच गया है। लाल निशान पार करने से डेंजर जोन पचरुखिया, हुकुम छपरा वह गंगापुर पर बने स्परों पर नदी के पलट प्रवाह से दबाव बढ़ गया है। इसके अलावा एनएच-31 पर खतरा मंडराने लगा है।
पहाड़ों पर बारिश के चलते गंगा का जलस्तर करीब एक सप्ताह से बढ़ रहा था। बढ़ते जलस्तर ने मंगलवार को दोपहर 12 बजे लाल निशान पार कर लिया। गंगा के लाल निशान पार करते हुए गंगा की लहरों ने तटवर्ती गांव पचरुखिया से लेकर केहरपुर तक की ओर रुख कर लिया है। कटान तेज हो गई है। जगह-जगह अरार गिरने का सिलसिला शुरू हो गया है। इतना ही नहीं फ्लड फाइटिंग के तहत नदी किनारे डाली गई बालू भरी बोरियां भी भर भरा कर के नदी के पेटे में समाती चली जा रही हैं। केंद्रीय जल आयोग गायघाट के अनुसार मंगलवार की शाम चार बजे गंगा का जलस्तर 57.70 मीटर दर्ज किया गया। साथ ही प्रति घंटा दो सेमी का बढ़ाव बना हुआ है। उधर, बाढ़ विभाग की उदासीनता का आलम यह है कि आज तक भगवान भरोसे फ्लड फाइटिंग के नाम पर गंगा की लहरों से लड़ने का प्रयास किया जा रहा है। गंगा में बढ़ाव जारी रहा तो गंगापुर व केहरपुर में फ्लड फाइटिंग के तहत बाढ़ विभाग की ओर से कराए गए कार्यों की पोल खुल जाएगी।