बेल्थरारोड (बलिया)। घाघरा के जल स्तर में निरंतर वृद्धि का क्रम जारी है। लाल निशान से ऊपर बह रही नदी उग्र होती जा रही। खासतौर पर नेपाल में बांध से पानी छोड़ दिए जाने से विकट स्थिति उत्पन्न हो गई है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, मंगलवार को जल स्तर 64.57 मीटर पर रहा। हालांकि आयोग ने अगले 24 घंटे में जल स्तर में वृद्धि होने की संभावना जताई है। लाल निशान 64.01 मीटर है।
हाहालाला से राजभर बस्ती टंगुनिया तक कई किलोमीटर भू- भाग में पानी फैल गया है और इसके दायरे में आने वाले सैकड़ों एकड़ धान, अरहर,मक्का, मूंगफली आदि पानी में डूब कर बर्बाद हो गई है। पशुओं के चारे के लिए पशुपालक परेशान हैं। प्रशासन द्वारा नाव की व्यवस्था नहीं किए जाने से पशुपालक दूसरे नाव से जाकर पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था कर रहे हैं। चैनपुर गुलौरा, खैरा खास, तुर्तीपार, मुजौना, बेल्थरा बाजार आदि गांव पानी से घिर गए हैं। चैनपुर क्षेत्र में कटान हो रही है। ग्रामीणों की माने तो देवरिया जिले के बरहज में बने ठोकर से टकराने के बाद नदी की जलधारा सीधे मुड़ते हुए बलिया जिले के तटवर्ती क्षेत्रों में पहुंचती है, जिससे कटान हो रही है। पिछले दो वर्षों के दौरान करीब दो हजार कृषि भूमि कट-कट कर कर नदी की धारा में विलीन हो चुकी है और कटान से रोकथाम की स्थाई व्यवस्था नहीं की गई तो हालात बदतर हो जाएंगे और लोगों को नदी की विनाशलीला से रूबरू होना पड़ेगा।
रामगढ़ संवाददाता के अनुसार गंगा के जलस्तर में एक बार फिर वृद्धि शुुरू हो गई है। बीते पांच दिनों में गंगा के जलस्तर में करीब एक मीटर की बढ़ोतरी हुई है। केंद्रीय जल आयोग गयाघाट के अनुसार गंगा का जल स्तर 56.02 मीटर दर्ज किया गया है। इसमें प्रति घंटा आधा सेंटीमीटर बढ़ाव का क्रम जारी है। गंगा का खतरा बिंदु 57.615 मीटर है। बाढ़ विभाग आज तक द्वाबा क्षेत्र में बाढ़ व कटान का स्थायी हल नहीं निकाल सका है। जिसके चलते आज भी गंगा के मुहाने पर बसे गांव के लोग भगवान भरोसे अपना जीवन यापन कर रहे हैं। पिछले कई दिनों से गंगा का जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ने लगा है और अब खतरा बिंदु से महज एक मीटर ही कम रह गया है। गंगा में बढ़ाव को लेकर तटवर्ती इलाके के लोगों का कहना है कऽि अगर गंगा का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो आने वाले समय में केहरपुर, सुघर छपरा, सोनरा टोला, लाला बगीचा टापू में तब्दील हो सकते हैं।
द्वाबा क्षेत्र में हर साल गंगा व घाघरा की लहरें तबाही मचाती है और दर्जनों गांवों का अस्तित्व आज तक मिटा चुकी है। अगर बाढ़ विभाग का यही रवैया रहा तो हर साल किसी न किसी गांव की जल समाधि होती रहेगी। क्योंकि इस साल बाढ़ विभाग की ओर से गंगापुर, केहरपुर के पास फ्लड फाइटिंग के तहत कटान निरोधक कार्य हुए थे। जिसकी पोल एक हल्की सी बारिश ने गंगापुर में बने कटर के बहने से खुल गई। यही हालात नरदरा, भुसौला, गड़ेरिया, सती घाट भुसौला और इब्राहिमाबाद नौबरार (अठगांवा) के कटान पीड़ितों की है। जहा गंगा व घाघरा ने कई घरों के आशियाने को वर्षो से अपने लहरों के आगोश में समेटती चली आ रही है। आज तक श्रीनगर, केहरपुर माफी, रिकनी छपरा सहित अन्य आधा दर्जन गांवो के लोगों को जिला प्रशासन की तरफ से कोई सहायता राशि आज तक नही मिल सकी।