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बागी धरतो से खो-खो में मिलेगी उचित मंजिल

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बलिया। रामलीला मैदान में आयोजित खो-खो क्लब चैंपियनशिप के लिए वाराणसी, आजमगढ़, बलिया सहित कई जनपदों की टीमें जनपद में आ चुकी हैं। चैंपियनशिप में खो-खो में नेशनल स्तर की कोच तथा खिलाड़ी भी आई हुई हैं।
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आजमगढ़ मंडल की श्रेजल सिंह का कहना है कि अब तक तीन नेशनल तथा आठ स्टेट लेवल चैंपियनशिप खेल चुकी हैं। यहां खो-खो क्लब चैंपियनशिप में भाग लेकर काफी उम्मीदे हैं। इस खेल में वह अपना कैरियर बनाना चाहती हैं।
नेशनल खेल चुकीं आजमगढ़ की शिवांगी यादव का कहना है कि यहां खेल चुकी कई खिलाड़ी अपना नाम राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दर्ज करा चुकी हैं। ऐसे में हमें इस खेल से काफी लगाव है। खो-खो में ही हम अपना कैरियर तलाश रहे हैं। पहले यह खेल गांवों में खेला जाता था। लेकिन यह खेल अब अपने सही मुकाम पर पहुंच चुका है। ऐसे में इस खेल को और अधिक बढ़ावा देने को जरूरत है। सरस्वती बालिका मंदिर बलिया की खो-खो खिलाड़ी पूजा सिंह का कहना है कि अब तक वह दो बार नेशनल खेल चुकी हैं। खो-खो से उसका लगाव काफी पुराना है। वह नेशनल के साथ इंटरनेशनल भी खेलना चाहती हैं। बस सरकार इस खेल को अधिक से अधिक प्रोत्साहन दे।
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सरस्वती बालिका विद्यामंदिर बलिया की खो-खो खिलाड़ी आंचल यादव ने बताया कि दो नेशनल तथा पांच अंतरप्रांतीय खो-खो चैंपियनशिप में भाग ले चुकी है। उसी के स्कूल से खेलने वाली मृगेंदु राय को जो मुकाम प्राप्त हुआ है उससे हम लोग प्रेरणा लेकर आगे बढ़ रहे है।
इंटरनेशनल खिलाड़ी तथा खो-खो नेशनल कोच प्रीति गुप्ता ने कहा कि यह बहुत बड़ा प्लेटफार्म है बलिया में इस तरह का आयोजन पहली बार हुआ है। जिससे युवा खो-खो खिलाड़ियों को बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। टूर्नामेंट खेलने से उनका हौसला भी बढ़ेगा। गांवों की प्रतिभा राष्ट्रीय फलक पर देखने को मिलेगी।
बलिया के सिकंदरपुर के फुलवरिया निवासी मृगेंदु राय इंटरनेशनल खो-खो में गोल्ड मेडल जीत चुकी है। उन्होंने बताया कि खो-खो का खेल सरस्वती शिशु मंदिर आनंदनगर से शुरू की थी बाद में सरस्वती बालिका विद्यामंदिर से खेलते हुए नेशनल और इंटरनेशनल खेेलने पहुंची जहां उन्हें कई अवार्ड दिए गए। कहा कि इस खेल में अंदर की छिपी प्रतिभा बाहर निकालने का मौका मिलेगा। बलिया में आयोजित खेल से प्रतिभावान खिलाड़ियों को तरासने का मौका मिलेगा। इस खेल के जरिए खिलाड़ी को नौकरी और पैसा के साथ ही शोहरत भी मिल सकती है।
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