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तीन साल बाद भी परवान नहीं चढ़ा नमामि गंगे र

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बलिया। जिले में नमामि गंगे योजना तीन साल बाद भी परवान नहीं चढ़ सकी है। गंगा को स्वच्छ बनाने के लिए गंगा किनारे के गांवों में शौचालय बनाने के लिए गांवों का चयन किया जाना था, लेकिन चयन में भी लापरवाही की गई है और कई गांव इस योजना से वंचित रह गए । वर्ष 2014-15 में भारत सरकार की ओर से नमामि गंगे योजना को लागू किया। हालांकि यह योजना पूरी तरह वर्ष 2015-16 में धरातल पर उतर सकी। इस योजना के तहत गंगा किनारे के गांवों को शौचालय से संतृप्त करने का प्रावधान किया गया और इसके लिए गांवों के चयन की प्रक्रिया शुुरू की गई। लेकिन हैरानी की बात है कि तीन साल बाद भी न तो गंगा किनारे के सभी गांव सूची में शामिल हो सके और न ही सूची में शामिल गांव शौचालय से ही संतृप्त हो सके। पंचायत राज विभाग की ओर से गंगा किनारे के पांच ब्लाकों सोहांव, दुबहड़, बेलहरी, मुरलीछपरा व बैरिया के कुल 41 गांवों का चयन किया गया जबकि करीब एक दर्जन गांवों को सूची में शामिल नहीं किया गया। इसमें सोहांव ब्लाक के ही भरौली, कुतुबपुर समेत कई गांव शामिल हैं। इस योजना के तहत कुल 33 हजार शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित करते हुए चयनित 41 गांवों को धनराशि उपलब्ध कराई गई। लेकिन दो विभागों की खींचतान में शुरुआती दौर के आवंटित 4552 शौचालय पूरी तरह नहीं बन सके। वर्ष 2014-15 में शौचालय निर्माण की कुल लागत नौ हजार एक सौ निर्धारित थी और इसमें पंचायती राज विभाग को चार हजार 600 व मनरेगा से चार हजार 500 का भुगतान होना था। आलम यह रहा कि पंचायती राज विभाग ने धनराशि भेजने के बाद इसका संज्ञान ही नहीं लिया। विभागीय लोगों की मानें तो मनरेगा का भुगतान तभी संभव है जब किए गए कार्य की फीडिंग की जाए लेकिन अधिकांश ब्लाकों ने इसमें लापरवाही बरती लिहाजा मनरेगा से भुगतान नहीं हो सका। हालांकि वर्ष 2015-16 व 2016-17 में शासन ने नमामि गंगे के तहत शेष 23 हजार 448 शौचालयों के निर्माण के लिए प्रति शौचालय 12 हजार की दर धनराशि भेजी। लेकिन इसके बावजूद शौचालयों के निर्माण में खूब मनमानी की गई। बतौर उदाहरण करीब नौ माह पहले बैरिया ब्लॉक के दयाछपरा गांव की जांच में अधिकारियों को शौचालय की धनराशि में आठ लाख का गोलमाल मिला था। अधिकारियों के निर्देश पर इस मामले में संबंधित सचिव आदि के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। आलम यह है कि गंगा किनारे के अधिकांश गांव अभी तक शौचालय निर्माण से संतृप्त नहीं हो सके हैं। एके यादव (डीपीआरओ, बलिया) ने बताया कि नमामि गंगे योजना के तहत गंगा किनारे के कुल 41 गांव चयनित हैं और यह कार्रवाई दो साल पहले की गई। वर्तमान में गंगा किनारे के प्रत्येक गांवों को शौचालय निर्माण से संतृप्त करने का कार्य चल रहा है। इसके अलावा अन्य गांवों में भी शौचालय निर्माण कराए जा रहे हैं ताकि अधिक से अधिक गांवों को ओडीएफ कराया जा सके।
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