लालगंज। सरकार बदलने के बाद भी कटान रोधी कार्य शुरू नहीं होने से ग्रामीणों में काफी नाराजगी है। जलस्तर में बढ़ाव से तटवर्ती गांवों के सैकड़ों लोगों के दिलों की धड़कनें तेज हो गई हैं। क्षेत्र में कटान प्रभावित क्षेत्रों में कटान रोकने की स्थाई व्यवस्था नहीं किए जाने से हर साल सैकड़ों एकड़ कृषि योग्य उपजाऊ भूमि के साथ ही दर्जनों लोगों के रिहायशी मकान गंगा नदी की जलधारा में समाहित होती रहती है।
कटान के समय शासन- प्रशासन के अधिकारी, कर्मचारी व जनप्रतिनिधियों का दौरा शुरू हो जाता है और कटान पीड़ितों को राहत दिलाने का भरोसा के साथ ही बड़े अधिकारी व जन प्रतिनिधि बाढ़ विभाग के अधिकारियों से जनता के बीच कटान रोकने के विषय में जानकारी लेकर कटान रोधी कार्य कराने का भरोसा देकर चले जाते हैं। साल बीत जाने के बाद कोई कार्य नहीं होता जिसके परिणाम स्वरूप कटान पीड़ितों की समस्या जस की तस बनी रहती है। कटान की त्रासदी झेल चुके लोग कटान प्रभावित गांव जगदीश पुर व नरदरा गांव के लोग सरकारी व्यवस्था के प्रति संतुष्ट नहीं है। जिलाधिकारी सुरेंद्र विक्रम सिंह पिछले दिनों बाढ़ के मद्देनजर क्षेत्र के दौरे में पूछे जाने पर स्पष्ट कर गए हैं कि कटान रोकने के लिए स्थाई व्यवस्था इन गांवों के लिए नहीं है। जिलाधिकारी के अनुसार कटान रोकने के लिए केवल बालू भरी बोरियां, पेड़ व टहनियों के माध्यम से ही कटान रोकने की व्यवस्था है । शायद यह काम भी नदी में कटान शुरू होने या पानी बढ़ने के बाद ही शुरू हो पायेगा, क्योंकि अभी तक किसी प्रकार का कटानरोधी कार्य इन गांवो को कटान से बचाने के लिए नहीं शुरू किया गया है। जिससे इस साल भी पानी बढ़ने व कटान के दिनों में तटवर्ती वाशिंदों को कटान की स्थिति का सामना केवल गंगा जी रहमो करम पर ही रहेगा।