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रोज गिराया जा रहा 50 टन कूड़ा

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नगर के महावीर घाट स्थित सड़क के किनारे फेंका गया कूड़ा। - फोटो : BALLIA
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बलिया। नगरपालिका परिषद की लापरवाही के चलते कटहल नाला के माध्यम से गंगा में कचरा प्रवाहित किया जा रहा है। इसके अलावा, शहर से निकला कूड़ा गंगा किनारे खाली स्थानों और महावीर घाट स्थित सड़कों के किनारे गिराया जा रहा है। हालात देखकर लगता है कि नगर पालिका ने गंगा के तटवर्ती इलाकों व सड़कों को कचरा घर बना दिया है। ऐसे में गंगा के साथ आसपास फैल रहे प्रदूषण से जनजीवन भी प्रभावित हो रहा है।
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शहर से काफी मात्रा में कूड़ा निकलता है। नगर पालिका के पास कूड़ा निस्तारण की कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं है। उसके कर्मी जहां भी खाली स्थान देखते हैं, उसी को कचरा घर बना देते हैं। हालांकि शहर से 16 किमी दूर बसंतपुर में कूड़ा निस्तारण केंद्र निर्माणाधीन है, लेकिन वह भी प्रशासनिक उपेक्षा के कारण अपने उद्धार की राह देख रहा है। कटहल नाला और गंगा किनारे गिरने वाले कचरे से प्रदूषण बढ़ने के साथ ही सड़क किनारे पड़े कूड़े के दुर्गध से लोगों का राह चलना मुश्किल हो जाता है। नगर पालिका की ओर से कूड़े को नगर में स्थित गड्ढों में, खाली प्लॉटों में एवं सड़कों के किनारे डंप किया जाता है, जिसमें सबसे प्रमुख है गंगा घाट (महावीर घाट ) जाने वाला मार्ग। इस मार्ग पर गायत्री मंदिर से लेकर महावीर मंदिर तक सड़क के दोनों किनारों पर यह ठोस अपशिष्ट कचरा डंप किया जा रहा है, जो अब भयावह रूप ग्रहण करता जा रहा है।
रोजाना 50 मीट्रिक टन निकलता है कचरा
नगर पालिका के अनुसार प्रतिदिन शहर से लगभग 50 मीट्रिक टन कचरा निकलता है। इसमें नालों की सफाई से निकलने वाला मलबा भी शामिल होता है। कचरा निस्तारण केंद्र के अभाव में कचरे को शहर में ही कहीं खाली जगह देख कर गिरा दिया जाता है। आबादी बढ़ने के बाद खाली जगहों पर नई कॉलोनियां बनने लगी हैं। एक तो जगह भी कम हो गई ऊपर से कचरा भी बढ़ गया। कूड़ा से छोटे-छोटे गड्ढे भरने बाद अब नगर पालिका कर्मियों ने शहर के बाहर का रुख किया है।
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नहीं चालू हुआ कचरा निस्तारण केंद्र
कचरा निस्तारण के लिए शासन की पहल पर वर्ष 2006 में नगर से बसंत पुर गांव नगर पालिका के लिए कचरा निस्तारण केंद्र की अधारशिला रखी गई। जिसके निर्माण का जिम्मा सीएनडीएस को मिला। सीएनडीएस ने टेंडर ए टू जेड कंपनी को दिया। इस कार्य में ए टू जेड ने एकार्ड कंपनी को पार्टनर बनाया, लेकिन दोनों कंपनियों के मध्य विवाद होने के बाद मामला ट्रिब्यूनल में चला गया। हालांकि वहां सीएनडीएस के पक्ष में फैसला आया, जिसके खिलाफ ए टू जेड ने हाईकोर्ट में अपील दायर कर दी। अदालत में मामला लंबित होने के कारण नगर पालिका को कूड़ा निस्तारण केंद्र मिलते-मिलते रह गया।
कूड़ा-कचरा जैसे-जैसे पुराना होता है, वैसे-वैसे खतरनाक बनता जाता है। पहले तो इससे केवल कार्बन डाईऑक्साइड जैसी गैस बड़ी मात्रा में निकलने लगती है। इसका सीधा असर रेस्पिरेटरी सिस्टम पर होता है और इनफेक्शन का खतरा रहता है। कुछ दिन बाद इससे मिथेन गैस बनने लगती है, जो काफी खतरनाक होती है। इसके बाद कचरे में वैक्टीरिया पनपते लगते हैं। अगर कूड़े के आसपास लोग खा रहे हों, तो वैक्टीरिया खाने के साथ बॉडी में जा सकते हैं। इसके आसपास से गुजरने पर भी कम खतरा नहीं है। कुछ दिन बाद तो कूड़ा गलने लगता है और यह हवा को भी जहरीला कर देता है। यह सांस के जरिए बॉडी में पहुंच सकता है। - डॉ बीपी सिंह, सीएमएस, जिला अस्पताल
कचरा निस्तारण केंद्र के विवादित होने से कुछ समस्या उत्पन्न हुई है। हालांकि इसके समाधान के तौर पर डोर टू डोर कचरा कलेक्शन कराया जा रहा है और उसे शासन द्वारा निर्देशित पद्धति के आधार पर निस्तारित कराया जा रहा है। कचरा निस्तारण केंद्र का मामला हल होते ही यह समस्या समाप्त हो जाएगी। - दिनेश कुमार विश्वकर्मा, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद, बलिया
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