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मुख्यमंत्री समग्र ग्राम योजना के गांव नहीं हो सके संतृप्त

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बलिया। मुख्यमंत्री समग्र ग्राम योजना के तहत चयनित सभी 17 गांवों का कायाकल्प नहीं हो सका है। आलम यह है कि तीन गांवों में शहीद सैनिक तोरण द्वार और 12 गांवों में आंगनबाड़ी केंद्र नहीं बने हैं। इसके अलावा अन्य विकास कार्यों में शिथिलता बरती गई है जबकि वित्तीय वर्ष समाप्त हो चुका है।
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प्रदेश सरकार ने वर्ष 2018-19 में मुख्यमंत्री समग्र ग्राम विकास योजना को लागू किया। इसके लिए शासन ने जिले से विकास कार्यों से वंचित रहे गांवों की सूची मांगी थी। इसके बाद शासन स्तर पर योजना के तहत जिले के 17 गांवों का चयन किया गया। इन गांवों में 24 योजनाओं का संचालन कर प्रत्येक योजना से गांव को संतृप्त करने का प्रावधान किया गया। इसमें विकास विभाग के अलावा समाज कल्याण, प्रोबेशन, दिव्यांग जन कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, बाल विकास एवं पुष्टाहार आदि विभागों की योजनाएं शामिल थीं। इसके लिए कुल 15 विभागों की जिम्मेदारी भी तय की गई।
इसके बाद शासन की ओर से गांवों को संतृप्त करने के लिए सूची जिला पंचायत अधिकारी कार्यालय को भेज दिया। इन गांवों को विभिन्न विभागों के माध्यम से संतृप्त करने के लिए डीपीआरओ को नोडल अधिकारी बनाया लेकिन वित्तीय साल बीत जाने के बाद भी कई गांव विभिन्न योजनाओं से वंचित रह गए। जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय के आंकड़े को देखें तो मुख्यमंत्री समग्र ग्राम विकास योजना के तहत चयनित चार शहीद सैनिक के गांवों में तोरण द्वार बनाए जाने थे लेकिन अभी तक महज एक गांव में यह कार्य हो सका है। इसके अलावा वैकल्पिक प्रकाश व्यवस्था के तहत चयनित 17 के सापेक्ष मात्र पांच गांवों ही कुल 524 सोलर लाइट लगे हैं जबकि शेष 12 गांव असंतृप्त हैं। इस योजना के तहत चयनित एक गांव में आवासहीन को आवास योजना की लौ तक नहीं पहुंच सकी है। योजना के तहत सभी गांवों में आंगनबाड़ी केंद्र बनाया जाना था लेकिन 12 गांवों में अब तक आंगनबाड़ी केंद्र नहीं बन सके हैं।
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मुख्यमंत्री समग्र ग्राम योजना के तहत चयनित गांवों को संतृप्त करने की जिम्मेदारी कुल 15 विभागों की थी। सभी विभागों को इस बाबत निर्देश दिया गया है। कई विभागों की योजनाएं संचालित हैं, जल्द ही सभी गांव संतृप्त हो जाएंगे।-डीएन दुबे, परियोजना निदेशक, बलिया
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