मनरेगा जाबकार्ड धारक पाई-पाई को मोहताज हो गए हैं। 745 जॉब कार्डधारकों का तीन माह से 67 लाख से अधिक का बकाया है। मजदूर अपनी मजदूरी पाने के लिए ब्लॉक का चक्कर लगा रहे हैं। उनका कहना है कि आम लोगों के यहां काम करने पर हमें खाना खिलाकर 250 रुपये रोज मिलता है, जबकि मनरेगा में रोजाना सिर्फ 175 रुपए। वह भी तीन चार माह का बकाया हो जा रहा।
जिले में मनरेगा कार्य रामभरोसे चल रहा है, सूत्रों की मानें तो इसके तहत 20 फीसदी कार्य कराए जाते हैं। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि गांव में मजदूरों की मजदूरी एक टाइम का खाना देने के बाद रोजाना 250 रुपये हो गया है, ऐसे में मनरेगा जाब कार्ड धारक रोजना 175 रुपये के हिसाब से कैसे काम करते होंगे। जबकि अधिकारी तथा कर्मचारी मस्टरोल के साथ खेल खेलकर अपना कमीशन भी निकालते हैं। मौजूदा समय में जनवरी माह से ही करीब 745 जाबकार्ड धारकों का 67 लाख 16 हजार 707 रुपये मजदूरी बकाया है।
जाब कार्डधारक तालिबपुर निवासी श्रीनाथ सिंह, जानकी देवी, बलिहार निवासी मुन्ना गोड़, कृष्ण नन्दन यादव सरीखे सैकड़ों की तदाद में जाबकार्ड धारक अपने मजदूरी भुगतान के लिए बैरिया ब्लाक का चक्कर लगा रहे हैं।
इस बाबत एपीओ बैरिया अजय सिंह ने कहा कि जाबकार्ड धारकों के मजदूरी भुगतान के लिए ब्लाक से सारी प्रक्रिया कर दी गई है, खाते में धन नहीं है, धन आते ही जाबकार्ड धारकों के खाते में मजदूरी का धन पहुंच जाएगा।