मझौवां। गंगा की लहरों से तटवर्ती इलाकों को बचाने के लिए शासन ने क्षेत्र में 54.77 करोड़ के चार बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी तो दे दी है, लेकिन धरातल पर इन योजनाओं की रफ्तार कछुआ चाल से भी सुस्त नजर आ रही है। मानसून आने में अब महज 40 दिन शेष हैं। सिर्फ तीन परियोजनाओं पर अभी मिट्टी और समतलीकरण का कार्य शुरू हुआ है। ऐसे में अधूरी तैयारियों ने हजारों ग्रामीणों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।
चक्की नौरंगा के लिए 9.98 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। यहां 300 मीटर की लंबाई में पत्थरों की 9 लेयर की पिचिंग होनी है, लेकिन तय समय सीमा से 52 दिन बीतने के बाद भी कार्य शुरू नहीं हो सका है। विभाग मजदूरों के अभाव का तर्क दे रहा है। नौरंगा और भगवानपुर के लिए 24.97 करोड़ स्वीकृत हुए हैं। यहां 2600 मीटर तक जियो बैग और पार्कोपाइन विधि से कार्य प्रस्तावित है। वर्तमान में जेसीबी से मिट्टी कटाई तो हो रही है, लेकिन ग्रामीण मानकों की अनदेखी का गंभीर आरोप लगा रहे हैं। दूबे छपरा के लिए 9.85 करोड़ मिले हैं। यहां 350 मीटर बोल्डर लांचिंग और एप्रन निर्माण होना है। इस प्रोजेक्ट पर 36 गांवों की किस्मत टिकी है, क्योंकि नदी के मुहाने पर बालिका विद्यालय, पीजी कॉलेज, स्वास्थ्य केंद्र और आस्था का केंद्र श्री कन्हई ब्रह्म बाबा का स्थान स्थित है। शिवपुर सेमरिया के लिए 9.97 करोड़ मिले हैं। यहां 500 की दूरी पर 10 कटर बनने हैं। 50-50 मीटर की दूरी पर दो डैम्पनर बनेगा। इसके अलावा 150 की गैपिंग रहेगी। इसमें पार्कोंपाइन का कार्य होना है। यहां मिट्टी को समतल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। गंगा नदी के किनारे चार प्रोजेक्ट पर 54.77 करोड़ की लागत से 37 गांव को बचाने का कार्य होना है।
अनियमितता के लग रहे आरोप
ग्रामीणों ने ठेकेदारों और विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं। शशि प्रकाश ठाकुर और बाबा ठाकुर का आरोप है कि बोरियों में मानक के विपरीत बालू की जगह मिट्टी भरी जा रही है। विरोध करने पर ग्रामीणों को एफआईआर की धमकी दी जा रही है। राजमंगल ठाकुर और यदुनाथ मिश्र ने सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा कि जानबूझकर काम में देरी की जा रही है, ताकि बाढ़ आने पर फ्लड फाइटिंग के नाम पर करोड़ों रुपये का हेरफेर किया जा सके। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में भी कार्य की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों का विरोध साफ देखा जा सकता है।
समय कम, चुनौती बड़ी
नियमों के मुताबिक, कटान रोधी कार्य 15 जून तक पूरे हो जाने चाहिए। अब जबकि मानसून सिर पर है, ग्रामीणों का डर वाजिब है। यदि 40 दिनों के भीतर बचाव कार्य पूरा नहीं हुआ, तो 21 हजार से अधिक की आबादी और करोड़ों की सरकारी संपत्ति गंगा की लहरों में समा सकती है।
टेंडर प्रक्रिया में कुछ देरी हुई है, इसलिए ठेकेदार को तीन महीने का समय दिया गया है। दूबे छपरा में 150 ट्रक बोल्डर आ चुके हैं और मिट्टी स्लोपिंग का कार्य जारी है। नौरंगा में मशीनें काम कर रही हैं। चक्की नौरंगा में जल्द ही डेट ऑफ स्टार्ट मिल जाएगा। सभी कार्य गुणवत्ता के साथ कराए जा रहे हैं। - संजय कुमार मिश्र, एक्सईएन