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जल निगम में करोड़ों के घोटाले की जांच को धमकी टीएसी की टीम

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बलिया। शहर में जल निगम की ओर से पिछले 12 सालों से चल रहे सीवर निर्माण कार्य में करोड़ों के घोटाले की जांच शुरू हो गई है। मंगलवार को जांच के लिए विभाग के टीएसी टीम प्रदेश मुख्यालय से पहुंची। टीम ने सीवर निर्माण से संबंधित पत्रावलियों को खंगाला और कार्यस्थल का भी जायजा लिया। टीम में व्यवस्था जल निगम लखनऊ के सचिव डीएल गौतम, टीएसी के अधिशासी अभियंता व जल निगम लखनऊ के लेखाकार रामेंद्र कुमार रहे। टीम ने बताया कि रिपोर्ट प्रदेश मुख्यालय भेजी जाएगी। कयास लगाया जा रहा है कि टीम के हाथ करोड़ों के घोटाले का प्रमाण लगा है। खासकर सीवरेज टेस्टिंग के नाम पर किए गए भुगतान का मामला है। इस बाबत अमर उजाला ने महीनों पहले खुलासा किया था वहीं तीन सप्ताह पहले इंटक के जिलाध्यक्ष विनोद सिंह ने जल निगम के चेयरमैन को शिकायती पत्र देकर टीएसी जांच की मांग की थी।
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वर्ष 2005 में चार जून को तत्कालीन नगर विकास राज्य मंत्री सीवर योजना का शिलान्यास किया। कुल 130 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले सीवर की स्वीकृति शासन ने वर्ष 2006-07 में देते हुए बतौर कार्यदायी संस्था जल निगम को नामित किया। लेकिन इसके बाद से ही सीवर विभाग के लिए चारागाह बन गया। वर्ष 2006-07 में कार्यदायी संस्था जल निगम की ओर से पूरे शहर में सीवरेज पाइप डाला गया और जगह-जगह होल बनाकर उसे ढक्कन से ढ़का गया ताकि जब भी जरुरत पड़े सीवरेज की साफ-सफाई आदि का काम किया जा सके। लेकिन इसमें करोड़ों का गोलमाल किया गया। वर्ष 2011 में विभाग ने यह दावा करते हुए काम बंद कर दिया कि सीवर का काम पूरा हो गया है जबकि प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होने के बाद एक बार फिर आनन-फानन में पाइप डालने का काम शुरु किया गया। इसके अलावा अप्रैल माह में शहर के घरों की कनेक्टिविटी देने के लिए सभी गलियों की खुदाई कर पाइप डाला गया लेकिन किसी भी गली का मरम्मत नहीं करा कर लाखों का गोलमाल किया गया। इसी बीच इंटक के जिलाध्यक्ष ने जल निगम के चेयरमैन को 17 सितंबर को शिकायती पत्र देक,र बताया कि सीवरेज के पेस्टिंग के नाम पर एक्सईन कायम हुसेन द्वारा तीन करोड़ का भुगतान कर गोलमाल किया गया है। यह भी बताया कि धरातल पर परियोजना पूरी नहीं हुई है और अपूर्ण परियोजना का हस्तांतरण कागजों पर ही नगर पालिका परिषद बलिया को कर दिया गया है।
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