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गंगा ने पार किया मीडियम फ्लड लेवल, मची गांवों में खलबली

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रामगढ़/जयप्रकाशनगर (बलिया)। द्वाबा क्षेत्र में पिछले तीन दिनों से गंगा और घाघरा नदियों का जलस्तर गिरने के बाद मंगलवार को एक बार फिर जलस्तर बढ़ने लगा है। बताया जाता है कि बिहार व मध्य प्रदेश से पानी छोड़ने के चलते जलस्तर में बढ़ाव शुरू हुआ है। बाढ़ से घिरे द्वाबा के दर्जनों गांवों में पर्याप्त मात्रा में न तो नाव ही लगाई गई हैं न ही राहत सामग्री का वितरण किया जा रहा। बढ़ाव इसी तरह से बना रहा तो चंद दिनों में ही गंगा उच्च स्तर को छू सकती है। बाढ़ से घिर गांवों लोग अपनी घर-गृहस्थी का सामान लेकर सुरक्षित ठौर ढूंढ रहे हैं। सबसे दयनीय हालात नदी के उस पार बसे गांव नौरंगा, भुआल छपरा, चक्की, उदयी छपरा के करीब 25 हजार आबादी की है जिसके आवागमन के लिए एकमात्र नाव ही सहारा है। उधर
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प्रशासन की ओर से कोरम के लिए जहां-तहां एक-दो नावें लगाई गई हैं जिससे किसी तरह से लोग अपने भोजन व दैनिक दिनचर्या का सामान जुटा पा रहे हैं। बच्चों की शिक्षा-दीक्षा तो दूर किसी किसी रात में भोजन के भी लाले पड़ जा रहे हैं। क्योंकि जो भी लकड़ी या उपला जुटा कर रखे थे वह बाढ़ की पानी से भींग गए हैं। रात के समय नदी की हुंकार गंगा के मुहाने पर बसे केहरपुर, चौबे छपरा, लाला बगीचा, सोनरा टोला के लोगों को रतजगा करने पर मजबूर कर दे रही है। लोगों को भय सताता रहता है कि कब नदी का रुख बिगड़ जाए और कटान करते हुए मकानों को पेटे में समाहित करना शुरु दे। इतना सब होने के बावजूद जिला प्रशासन व बाढ़ विभाग केवल कागजी खानापूति व दावे में व्यस्त है। अभी तक बाढ़ प्रभावित इलाके में लोगों जिले के आला अफसर तक नहीं पहुंच सके हैं। केवल रामगढ़ ढाले पर एक बाढ़ चौकी स्थापित की गई है जहां न तो कोई कर्मचारी रहता है और अधिकारी ही पहुंचकर इसकी सुधि लेते हैं। पिछले दो-तीन दिनों तक स्थिर रहने के बाद सोमवार से गंगा के जलस्तर में एक बार फिर बढ़ोतरी होने से लोगों की नींद उड़ी हुई है।
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