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सात फीसदी गांव ही हो सके हैं ओडीएफ

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बलिया। केंद्र सरकार की ओर से स्वच्छ भारत मिशन अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत गांव के प्रत्येक घर में शौचालय बनवा कर गांव को ओडीएफ करने का काम किया जा रहा है। लेकिन जिले में अभी तक महज 7 फीसदी गांव ही ओडीएफ हो सके हैं। यही गति रही तो अगले कई सालों तक भी जनपद के सभी गांव ओडीएफ नहीं हो सकेंगे।
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जनपद में 2 अक्तूबर 2014 को स्वच्छ भारत मिशन अभियान की शुरुआत की गई। इसके तहत जिले के कुल 1843 गांवों को ओडीएफ करने के लिए 3 लाख 87 हजार 980 शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया। शासन की ओर से प्रति शौचालय 12000 रुपये के हिसाब से समय-समय पर धनराशि उपलब्ध कराई गई। लेकिन शौचालयों के निर्माण की गति काफी धीमी रही। आलम यह है कि अधिकांश गांव में अभी तक शौचालय निर्माण का काम पूरा नहीं हो सका है। पंचायती राज विभाग के अधिकारियों की माने तो दिसंबर 2017 में ही जिले के सभी गांव ओडीएफ हो जाने चाहिए थे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। हालांकि इसको देखते हुए शासन ने ओडीएफ की समय सीमा 2 अक्तूबर 2018 तक बढ़ा दी है। लेकिन इस समय सीमा में भी जिले के गांवों के ओडीएफ होने की उम्मीद नहीं लग रही है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अब तक केवल 126 गांव ही ओडीएफ हो सके हैं।
पंचायती राज विभाग कार्यालय के अनुसार, 2 अक्तूबर 2014 से अब तक 57 हजार 310 शौचालय बन चुके हैं। वर्तमान में 8000 शौचालयों की धनराशि शासन से प्राप्त हुई है, जिसे 518 गांवों को भेजा जा रहा है। वर्ष 17- 18 में केवल 9103 शौचालय बन सके हैं। अधिकारियों की माने तो शौचालयों के निर्माण में कई अड़चने आ रही हैं। बताया जाता है कि लाभार्थी पैसा मिलने के बाद ही काम कराना चाहते हैं जबकि विभाग काम कराने के बाद पैसा देना चाहता है। इसके अलावा मटेरियल की अनुपलब्धता व महंगाई भी इसके पीछे कारण है। स्वच्छता अभियान के बीते साढ़े तीन सालों में केवल 07 फीसदी गांव ही ओडीएफ हो सके हैं। इससे साफ है कि 2 अक्टूबर 18 तक भी जिले के सभी गांव ओडीएफ नहीं हो पाएंगे।
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