बलिया। सूबे की सरकार भले ही हर विभाग में व्यवस्था ठीक करने का दावा ठोंक रही है। लेकिन अब भी जिले का अगिभनशमन महकमा वाहन चालकों की कमी से जूझ रहा है। आलम यह है कि जिले के तीन अगिभनशमन केंद्रों पर मात्र तीन वाहन चालक है। जिनके भरोसे ही जिले के सभी क्षेत्रों में आग लगने पर वाहनों के साथ मौके पर अगिभनशमन कर्मचारी पहुंचते है। ऐसे में एक भी फायर स्टेशन का कर्मचारी संयोग से बीमार पड़ गया तो स्थित भगवान के भरोसे ही रह जाएगी।
जिले में फायर स्टेशन के नाम पर तीन जगह अगिभनशमन केेंद्र स्थापित की गई। जिसमें जिला मुख्यालय स्थित अगिभनशमन केंद्र पर आठ अगिभनशमन वाहन के सापेक्ष दो वाहन चालक है। जिसमें से एक की ड्यूटी प्रयाग के कुंभ मेले में लगा दी गई है। जबकि दूसरे वाहन चालक को मुख्य अग्निशमन अधिकारी के वाहन के साथ सभी छोटे-बड़े वाहनों को चलाना पड़ता है। जबकि बांसडीह में दो चालक तो है लेकिन उसमें से एक चालक को स्पेशल ड्यूटी में लगाया गया है। वहां भी एक ही चालक के भरोसे कामकाज चल रहा है। वहां पर न तो अगिभनशमन अधिकारी न तो द्वितीय अग्निशमन अधिकारी की तैनाती है। वहीं रसड़ा में भी एक भी अगिभनशमन विभाग का चालक नहीं है। ऐसे में इस फायर स्टेशन के लिए जिला मुख्यालय से ही अगिभनशमन विभाग का चालक भेजकर काम चलाया जाता है। ऐसे में अगर हर क्षेत्रों में आग लग जाती है तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कि चालक के अभाव में कितना तेजी से मौके पर अगिभनशमन दस्ता पहुंच सकती है। सबसे दिलचस्प तो यह है कि हर केंद्र पर भगवान भरोसे ही काम चल रहा है।
इस बावत पूछे जाने पर प्रभारी जिला अगिभनशमन अधिकारी कन्हैया यादव ने बताया कि चालकों की कमी की बात हर बार शासन को पत्र के माध्यम से सूचित किया जाता है। लेकिन शासन की ओर से अब तक चालक जिले को नहीं दिए गए।