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शरद पूर्णिमा पर लक्ष्मी मंदिरों में उमड़े भक्त

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बलिया/रतसर। संतान की लंबी उम्र और हर काम में सफलता की कामना को लेकर महिलाओं ने गुरुवार को शरद पूर्मिमा का व्रत रखा तथा पूूूजा अर्चना की। अश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि इस रात चन्द्रमा 16 कलाओं से परिपूर्ण होकर अमृत वर्षा करता है। इस दिन व्रत रखने से संतान की लंबी उम्र और हर काम में सफलता मिलती है।
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शरद पूर्णिमा पर प्रात: काल ब्रह्ममुहूर्त में स्नान करने के बाद महिलाएं व पुरुषों ने देवी लक्ष्मी की पूजा अर्चना की। सुबह से ही मंदिरों में पूजा अर्चना करने के लिए महिलाएं पहुंची। विधि विधान से पूजन अर्चन करने के बाद महिलाओं ने व्रत भी रखा। पुराणों के अनुसार मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी का जन्म हुआ था। जिसके उत्सव आज के दिन मनाते हैं। यह भी कहा जाता है कि मां लक्ष्मी इस दिन उल्लू में सवार होकर धरती पर आती है और वह देखती है कि कौन इस रात को जगकर उनकी पूजा-अर्चना कर रहा है। इसके उपरांत वो फल देती है। ज्योतिषियों की मानें तो इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा सच्चे मन और श्रृद्धा के साथ करने से सभी मनोकामनाएं, धन की प्राप्ति होती है।
रतसर : जनऊपुर गांव स्थित मां काली मंदिर प्रांगण में हरिनाम संकीर्तन के साथ ही विशाल भण्डारे का आयोजन किया गया। जिसमें हजारों की संख्या में जुटे श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इसके पूर्व तड़के सुबह मंदिर परिसर से हाथी,घोड़े, ऊंट, से सजी ध्वज पताका की शोभायात्रा निकाली गई जो गांव के विभिन्न मार्गों से होते हुए मंदिर परिसर पहुंची जहां मंत्रोच्चार के बीच ध्वज स्थापित किया गया। आचार्य पं.रामचंद्र मिश्र के देखरेख में सभी धार्मिक अनुष्ठान पूर्ण हुए। इस अवसर पर प्रेम नारायण पाण्डेय, योगेंद्र पाण्डेय, हृदयानंद, राजनारायण पाण्डेय, श्रीकांत पाण्डेय ,राम कुमार पाण्डेय सहित गणमान्य उपस्थित रहे। आयोजन प्रमुख धनेश पाण्डेय ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।
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