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दिन-प्रतिदिन घट रही छात्र की संख्या

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रसड़ा। शिक्षा क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों में सरकार द्वारा तमाम सुविधा देने के बावजूद दिन-प्रतिदिन छात्रों की संख्या घटती ही जा रही है । विद्यालयों की दुर्दशा एवं शिक्षा के गिरते स्तर के लिए अध्यापक के साथ विभाग भी कम ज़िम्मेदार नहीं है। परिषदीय विद्यालयों पर कॉन्वेंट स्कूलों से भी ज्यादा खर्चा सरकार कर रही है। शासन मध्यान्न भोजन, छात्रवृत्ति, ड्रेस, मुफ्त किताब, फीस आदि की व्यवस्था कर रहा है।
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इसके बाद करोड़ों रुपयों खर्च करके प्रत्येक वर्ष विद्यालयों द्वारा निकाले जाने वाले स्कूल चलो रैली भी अभिभावकों एवं छात्रों को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए निकाली जाती है। इसके बाद भी परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा का स्तर दिन प्रतिदिन गिरता ही जा रहा है। स्कूलों की व्यवस्था सुधरने का नाम नहीं ले रहा है। जिसका प्रमुख कारण सरकारी तंत्र की लापरवाही है। क्षेत्र में तमाम ऐसे विद्यालय हैं, जहां बच्चे कम अध्यापक ज्यादा है, जहां बच्चे ज्यादा वहां अध्यापक कम है। एक बानगी के तौर पर कोटवारी न्याय पंचायत में ही कोटवारी प्राथमिक विद्यालय पर 2 अध्यापकों के जिम्मे 240 छात्र है। वहीं प्रधानपुर प्राथमिक विद्यालय पर लगभग 275 छात्रों पर 8 अध्यापक है। हथुई प्राथमिक विद्यालय पर लगभग 70 छात्रों पर 4 अध्यापक कार्यरत है। उसी प्रकार छितौनी जूनियर हाईस्कूल में 90 छात्रों पर आधे दर्जन से अधिक अध्यापक है। नसीरपुर एवं मुंडेरा जूनियर हाईस्कूल में भी यही हाल है की छात्रों के सापेक्ष अध्यापकों की संख्या कहीं ज्यादा है। जहां अधिक शिक्षक होने के बावजूद भी छात्रों की संख्या नहीं बढ़ रही है तो कम अध्यापकों के सहारे विद्यालयों पर छात्रों की संख्या बढ़ाना अंधेरे में तीर चलाना है। शिक्षा विभाग शासन से प्राप्त सभी सुविधाओं को स्कूल पर मात्र पहुंचा देने में अपनी जिम्मेदारी समझता है वही अध्यापक पूरे समय सरकारी सुविधाओं को लागू करने में ही अपनी जिम्मेदारी समझता है। अध्यापक लागू करे भी क्यों नहीं विभाग द्वारा सरकारी सुविधाओं को क्रियान्वयन न किए जाने पर कार्रवाई तो करता है। परंतु शिक्षा में लापरवाही बरते जाने पर विभाग कोई कार्रवाई नहीं किया जाता है। शिक्षक अपना मूल उद्देश्य शिक्षा देने के उद्देश्य से भटक कर सरकारी योजनाओं को क्रियान्वयन करना ही अपना उद्देश्य समझते है। अभी भी शासन प्रशासन नहीं चेता तो वो दिन दूर नहीं जब छात्रों के अभाव में परिषदीय विद्यालय शो पीस बनकर रह जाएगा।
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