कलेक्ट्रेट परिसर में बना ड्रामा हाल
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प्रतिभा का जौहर दिखाने वालों नवोदित कलाकारों को नया आयाम मिलने जा रहा है। कलेक्ट्रेट कर्मचारी संघ के प्रयास से कलेक्ट्रेट परिसर में 28 वर्षों से बंद पड़े ड्रामा हाल का पुनरुद्धार किया गया है। 64 वर्ष पूर्व स्थापित इस ड्रामा हाल में अब फिर से नाटक व अन्य रंगमंच के कार्यक्रमों का आयोजन हो सकेगा। इससे न युवा प्रतिभाओं को बेहतर मंच मिलेगा।
रंगकर्मी विवेकानंद सिंह ने ने नगर में विकसित शैली के नाटक की प्रस्तुति 1884 ई में ददरी मेला में भारतेंदु बाबू हरिश्चंद्र द्वारा निर्देशित नाटक सत्य हरिश्चंद्र व नील देवी के मंचन किया था। कालान्तर में ज्यो नाइल क्लब व टाउन क्लब की स्थापना हुई और 1947 में कचहरी क्लब के तत्वावधान में भारत के स्वतंत्र होने के उपलक्ष्य में नाटक राज मुकुट व चंद्रगुप्त का मंचन किया गया था। सन 1953 में जिलाधिकारी महेशचंद्र शर्मा की प्रेरणा से कलेक्ट्रेट ड्रामेटिक एसोसिएशन की स्थापना की गई और रामलीला मैदान में अशोक का मंचन हुआ। 06 जनवरी 1954 को शर्मा द्वारा ड्रामा हाल का शिलान्यास हुआ और इस मंच पर कुणाल, कोर्णाक, आम्रपाली, शबरी, ममता, होरी, विजय पर्व, बाबू, कलिंग विजय, जय भारत एवं 1973 में यह भी जिंदगी है का मंचन किया गया।
जनवरी 1986 में जिलाधिकारी अमल कुमार वर्मा की देख रेख में सत्य राजा हरिश्चंद्र का मंचन किया गया। जलता देश और 1989 में संघ के अध्यक्ष शिवनाथ भारती के कार्यकाल में लखनऊ के बंगाली क्लब में नाटक प्रस्तुत हुआ और इस मंच पर सपनों का संसार के मंचन के बाद ड्रामा हाल बंद हो गया। लेकिन नगर के रंगकर्मियो के आग्रह पर कलेक्ट्रेट कर्मचारी संघ के अध्यक्ष कौशल कुमार उपाध्याय व मंत्री संजय कुमार भारती की कोशिश से जिलाधिकारी द्वारा इसका पुनरुद्धार किया गया। ताकि नगर के नवोदित कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने को मौका मिल सके।