फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ballia News: जिले में 250 एंबुलेंस चालक, 10 पर आपराधिक मुकदमे

विज्ञापन
विज्ञापन
बलिया। अपराधी प्रवृत्ति के लोग भी जिले में एंबुलेंस चालक बन गए हैं। 250 एंबुलेंस चालकों में से 10 पर मारपीट सहित अन्य मामलों में सदर कोतवाली सहित अन्य थानों में मुकदमा दर्ज है।
विज्ञापन

परिवहन विभाग में करीब 250 एंबुलेंस का पंजीकरण है। इसमें 102 और 108 नंबर के लिए 80 एंबुलेंस हैं। 170 निजी एंबुलेंस हैं। लेकिन धरातल पर इससे दो से तीन गुना एंबुलेंस का संचालन हो रहा है। कई का तो टूरिजम, प्राइवेट वाहनों के नाम से पंजीकरण हुआ है। बिहार, गाजियाबाद, दिल्ली सहित अन्य महानगरों के नंबर और वहीं के लोगों के नाम से पंजीकृत एंबुलेंस को कम पैसे में स्थानीय लोग खरीद कर चलवा रहे हैं। चालकों को लेकर कोई सत्यापन नहीं है, इसलिए अपराधी प्रवृत्ति के लोगों को संचालकों ने चालक रख लिया है। इस तरह के एंबुलेंस चालकों का रिकार्ड अस्पतालों या सीएमओ कार्यालय के पास भी नहीं है। बस्ती की घटना के बाद भी परिवहन व स्वास्थ्य विभाग मानक विहीन निजी एंबुलेंस के खिलाफ कोई कार्रवाई या जांच नहीं कर रहा है।

जिला अस्पताल परिसर बना एंबुलेंस स्टैंड : एंबुलेंस पर निजी अस्पताल का नाम लिखकर सरकारी अस्पताल के मरीज ढोने का काम चालक करते हैं। कमीशन के चक्कर में इमरजेंसी से लेकर वार्डों में भर्ती मरीजों के तीमारदारों को बरगलाकर ये लोग मऊ, गाजीपुर और वाराणसी के निजी अस्पताल पहुंचा देते हैं। कमीशन का कुछ हिस्सा डयूटी में तैनात चिकित्सक व फार्मासिस्ट को भी पहुंचता है। कई मरीजों द्वारा इसकी शिकायत की गई लेकिन आज तक किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई।
विज्ञापन



परिवहन विभाग के आरआई राजभूषण ने कहा कि परिवहन विभाग एंबुलेंस का सिर्फ फिटनेस और चालक का लाइसेंस चेक करती है। उसकी क्राइम हिस्ट्री की जांच अस्पताल संचालक को करनी चाहिए। बाकी उसमें लगे उपकरण की जांच का काम स्वास्थ्य विभाग का है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें