बलिया। जिला अस्पताल में स्थित ब्लड बैंक में ब्लड को सुरक्षित रखने के तमाम इंतजाम तो हैं लेकिन अभी भी ऐसी सुविधाओं की दरकार है, जिससे व्यवस्था प्रभावित होती रहती है। करीब 250 यूनिट ब्लड रखने की क्षमता वाले जिला चिकित्सालय में स्थित ब्लड बैंक में जनरेटर नहीं है, ऐसे में बिजली कटने पर चिकित्सक एवं कर्मचारियों के हाथ-पांव फूलने लगते हैं, ब्लड को सुरक्षित रखने के लिए बिजली प्राथमिकता के तौर पर होनी चाहिए। इसके अलावा ब्लड बैंक में सिर्फ एक एसी है, जबकि यहां तीन एसी की आवश्यकता है। ऐसे में जब ब्लड बैंक में एक साथ कई डोनर पहुंच जाते हैं तो उन्हें परेशानियां होती हैं।
ब्लड बैंक प्रभारी डा रामानंद सिद्धार्थ ने बताया कि ब्लड बैंक में अभी संसाधनों का अभाव है। यहां जनरेटर नहीं होने से परेशानी होती है। स्थाई रूप से ब्लड बैंक में जनरेटर लगवाने के लिए सीएमएस के माध्यम से मुख्यालय को पत्र भेजा गया है। स्थाई जनरेटर लगने से ब्लड को सुरक्षित रखने में कोई जोखिम नहीं रहेगा। इसके अलावा अभी तक कंप्यूटरीकरण की भी व्यवस्था नहीं हुई है। इसके लिए शासन स्तर से बातचीत की जा रही है। उन्होंने बताया कि यहां प्रतिमाह करीब 200 यूनिट ब्लड की जरूरत होती है, जिसे गरीब, असहाय व गर्भवती महिलाओं को आवश्यकतानुसार दिया जाता है। उन्होंने बताया कि ब्लड डोनेशन को लेकर तमाम संस्थाएं हर माह कैंप लगाकार ब्लड डोनेट करवाती हैं, जिससे ब्लड बैंक को प्रतिमाह औसतम 40 से 50 यूनिट ब्लड उपलब्ध हो जाता है।
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डीएम के आदेश के बाद भी नहीं हुई व्यवस्था
बलिया। विश्व रक्तदान दिवस के अवसर पर जिलाधिकारी सुरेंद्र विक्रम ने ब्लड बैंक का निरीक्षण के दौरान ब्लड बैंक में अव्यवस्था मिलने पर नाराजगी जताई थी साथ ही सख्त हिदायत दी थी कि ब्लड बैंक में आईसीयू की तरह से सुविधाएं होनी चाहिए। इसके अलावा ब्लड स्टोर रूम में एसी लगवाने का निर्देश दिया था, लेकिन उनके निर्देश के बावजूद भी ब्लड बैंक में सुविधाएं नहीं हैं। ब्लड बैंक में आने वाले लोगों को बैठने के लिए पर्याप्त कुर्सियों की भी व्यवस्था नहीं है।