फेफना। किसी पशु की मृत्यु के कारण पशुमालिक को आर्थिक नुकसान न हो, इस सोच के साथ प्रदेश सरकार द्वारा पशुओं का बीमा करने का शासनादेश दिसंबर माह में ही जारी कर दिया था। लेकिन स्थानीय पशु अधिकारी द्वारा पशु बीमा योजना में रुचि न लेने से क्षेत्र के कोट, मंझरिया, अंजोरपुर, इंदरपुर, थम्हनपुरा, हसनपुरा, गंगहरा सहित अन्य कई गांवों के सैकड़ों पशुओं का बीमा आज तक नहीं हो सका है। इस क्षेत्र में पशु बीमा इसलिए भी आवश्यक हैं क्योंकि यहां कई गांवों में युवक पशु पालन और दूध बिक्री को ही अपना रोजगार बना चुके है। उन्होंने कीमती गाय और भैंसें पाल रखी हैं।
इस संबंध में पशुधन प्रसार अधिकारी डॉ. सच्चिदानंद ने बताया की गाय, भैंस, घोड़ा, गधा, सहित कुल 12 प्रकार के पशुओं का बीमा किया जाना है। अब नियत प्रीमियम जमा करने पर संबंधित पशु का तीन वर्ष का बीमा होगा। इसके लिए उन्होंने उच्चाधिकारी से अनुरोध भी किया है। पशु मालिक चंदन कुमार दुबे ने बताया की मेरे पशुओं का बीमा जुलाई से फेल है और यदि इसी बीच पशु किसी दुर्घटना का शिकार हो जाता है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। पशु मालिक मनजी यादव, रामायण सिंह, राजू सिंह, लाल जी दुबे आदि ने पशुओं का बीमा जल्द कराने की मांग की है।
पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. रमेश कुमार वर्मा का कहना है कि अभी मेरी चुनाव में ड्यूटी लगी है। समय मिलते ही क्षेत्र में पशुओं का बीमा कर सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाएगा।