लोक अदालत ने अपने फैसले में लगभग 9 साल से क्षतिपूर्ति के लिए विद्युत विभाग का चक्कर लगा लगा रहे पीड़ितों को सुलह समझौते के आधार पर एक माह के अंदर न्याय दिया है । लोगों को मुकदमों से बचने और सुलह समझौते के आधार पर मामलों का निस्तारण करने के लिए स्थायी लोक अदालत बनाया गया है । दीवानी न्यायालय प्रांगण में चल रहे स्थायी लोक अदालत में परासिया रुद्रपुर की निवासी कलावती देवी , विक्रम यादव व गोपाल यादव ने स्थाई लोक अदालत में पांच जनवरी को आवेदन दिया। आवेदन बताया कि उसके खेत में बिजली के पोल लगे हैं। 4 अप्रैल 2009 को शॉर्ट सर्किट से उनके खेत में गेहूं की फसल जलकर राख हो गई । यह बिजली विभाग की लापरवाही है। इसकी जांच विद्युत मंडल द्वारा कराकर 29 नवंबर 2011 को कराया गया और भुगतान के लिए विभाग को आदेशित किया । लेकिन आज तक उनको भुगतान की धनराशि प्राप्त नहीं हुई। अपने मुआवजे की मांग को लेकर वह बराबर अधिशासी अभियंता विद्युत वितरण खंड प्रथम यहां दौड़ते रहे । लोक अदालत में यह मामला आने के बाद कमेटी ने दोनों लोक अदालत की कमेटी ने दोनों पक्षो की बात सुनी । विद्युत वितरण खण्ड प्रथम की ओर से प्रत्येक के नाम से अलग अलग धनराशि उपलब्ध कराने की बात कही और सभी के नाम से क्रमश: 4600, 4800, 4800 का चेक कलावती देवी, विक्रमा यादव व गोपाल यादव के नाम से स्थाई लोक अदालत की कमेटी को दिया। जिसे कमेटी ने शिकायतकर्ता को देकर मामले का निस्तारण सुलह समझौते के आधार पर निस्तारित किया।