भीमपुरा। किडिहरापुर रेलवे स्टेशन को आज भी विकास को इंतजार है। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के पैतृक गांव के निकट होने के बावजूद यह स्टेशन मौजूदा समय में आंसू बहाने को मजबूर है। यात्री सुविधाओं से महरूम इस रेलवे स्टेशन पर मूलभूत सुविधाएं भी न के बराबर है।
स्टेशन पर एकल खिड़की होने के कारण टिकट के लिए आए दिन मारामारी होती है। रात के वक्त लाइट गुल होने के कारण चो-उचक्के सक्रिय हो जाते हैं। शौचालय के अभाव में स्टेशन के ईर्द-गिर्द का परिसर गंदगी से पटा है। पीने के लिए शुद्ध पानी नहीं मिलता। सुरक्षा के नाम पर कोई आरपीएफ गश्त नहीं लगाता। प्लेटफॉर्म से ऊंचा रेलवे ट्रैक होने के कारण दुर्घटना से भी इंकार नहीं किया जा सकता। उनके पुण्यतिथि, जन्मतिथि पर एक से बढ़कर एक नेता वायदे तो करते हैं। उनके नाम पर जगह-जगह स्मृतियां भी बनाते हैं। लेकिन पैतृक गांव ही उपेक्षा के शिकार है।
रेल मंत्री को पत्र लिख मूलभूत सुविधाएं देने की मांग
भीमपुरा। क्षेत्र के बरवां रत्तीपट्टी निवासी पारस नाथ सिंह ने रेल मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखकर वाराणसी-गोरखपुर इण्टरसिटी एक्सप्रेस को किडीहरापुर रेलवे स्टेशन पर ठहराव की मांग की है। पत्र में उलेख्य किया है कि एक दशक पूर्व एक जनप्रतिनिधि प्रयास से ट्रेन का ठहराव हुआ था।लेकिन कुछ कारणों से इस ट्रेन का ठहराव बन्द कर दिया गया। यह स्टेशन पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी से जुड़ा हुआ है। क्षेत्र के दर्जनों ग्राम प्रधानों से हस्ताक्षर करा कर इंटरसिटी ट्रेन का ठहराव की गुहार लगाई है। साथ ही मूलभूत सुविधाओं से लैस करने की मांग की है।