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दीपावली को लेकर शुरू हुआ घरों का रंग रोगन

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बलिया। दीपावली अब पांच दिन रह गया है। नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अपने-अपने घरों और प्रतिष्ठानों की साफ-सफाई व रंग-रोगन का कार्य करा रहे हैं। इस दौरान रंग-रोगन करने वाले अच्छे मिस्त्री व मजदूर नहीं मिल पा रहे है। अगर कोई मिल भी गया तो वह 350 से 400 रुपये के साथ ही विभिन्न शर्तें रख रहे हैं। इस दौरान सबसे खस्ताहाल राजमिस्त्रियों व अन्य मजदूरों का है, जो बालू के रोक के कारण घर पर बैठेेेेेे हुए है। इस वर्ष इनकी दीपावली फीकी नजर आ रही है।
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प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी दीपावली के अवसर पर नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक घरों में साफ-सफाई और रंग-रोगन का कार्य चल रहा है। इस दौरान बालू के अभाव में राजमिस्त्री व मजदूर अपने-अपने घरों में महीनें भर से बैठे हुए है। वहीं रंग-रोगन के मिस्त्री व मजदूर ढूढ़ने पर नहीं मिल रहे है। इन मिस्त्री व मजदूरों की चांदी कट रही है। नगर के चित्तू पांडेय चौराहा, आईआईटी चौराहा और कदमतर मजदूरों की मंडी है। लेकिन यह स्थान महीने भर से खाली-खाली दिख रहा है। आलम यह है कि राजमिस्त्री व मजदूर 200 से 250 रुपये पर भी कार्य करने को तैयार है। लेकिन रंग-रोगन के मजदूर 350 से 400 रुपये की डिमांड के साथ ही विभिन्न शर्ते रख दे रहे है।
रंग-रोगन के मिस्त्री नौ बजे के बजाय 10 बजे तक कार्य पर आ रहे है और शाम को पांच बजे जाने के बजाय चार बजे ही चलते बन रहे है। जिससे मालिक की कमर टूट जा रही है। मजूदर छठ्ठू ने बताया कि महंगाई होने के कारण मजदूरी 350 से 400 रुपये लेनी पड़ रही है। रंगरोगन मिस्त्री अनिल कुमार ने बताया कि रंग-रोगन का कार्य सबकों नहीं आता है। पहले चूना और रामराज मिट्टी से रंगरोगन किया जाता था। अब विभिन्न प्रकार के रंग बाजार में आ गए है। जिसे रंगने में समय लग रहा है। उसके हिसाब से मजदूरी कोई महंगा नहीं है।
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