फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

प्रतीकात्मक बंदी कर व्यापारियों ने किया भारत बंद का समर्थन

विज्ञापन
विज्ञापन
बलिया। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के विरोध में भारत बंद के आह्वान पर व्यापारियों ने करीब डेढ़ घंटे तक प्रतीकात्मक बंदी के रूप में दूकानें बंद रखी। अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने नगर के शहीद पार्क चौक से व्यापारी नेता अरविंद गांधी के नेतृत्व में व्यापारियों ने नगर भ्रमण कर दूकानें बंद कराई। तत्पश्चात शहीद पार्क चौक पर इकट्ठा होकर वित्तमंत्री अरूण जेटली का पुतला दहन किया।
विज्ञापन

इस दौरान आयोजित सभा को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के प्रांतीय उपाध्यक्ष अरविंद गांधी ने कहा कि जीएसटी में लागू किए गए व्यापारी विरोधी प्रावधानाें को हटाना होगा। अभी तो हम व्यापारी पूर्ण रूपेण जीएसटी के बारे में नहीं समझ सके है, ऐसे में प्रतीकात्मक बंदी कर केंद्र और प्रदेश सरकार को आगाह करने का काम किया है। कहा कि व्यापारियों की गिरफ्तारी, संपत्ति जब्त का प्राविधान, पेनाल्टी का प्राविधान सहित अन्य जटिलताओं को दूर किया जाए। कहा कि व्यापारियों की बदौलत देश व प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी, लेकिन शुरू से ही व्यापारी हितों पर कुठाराघात किया गया। इस मौके पर सुनील वर्मा, टिंकू वर्मा, अरमान, मनोहर, रामजी तुरहा, राजेश शाह, सतीश अग्रवाल, अनिल रौनियार, मनीष गुप्ता आदि लोगों ने संबोधित किया। पुतला दहन करने वालों में राजेश गुप्ता, मनोज राय, सत्यनारायण, गोपाल जी शिंदे, बलवंत पांडेय, सुनील पांडेय, विजय गुप्ता, सुशील, गणेश, सुरेश स्वर्णकार, डीके वर्मा, रौशन पांडेय आदि लोग उपस्थित रहे। उधर, ग्रामीण क्षेत्रों एवं नगर पंचायत इलाकों में जीएसटी के विरोध में होने वाले भारत बंद का असर नगण्य रहा। दूकानदार दूकान खोलने के बाद इस प्रक्रिया को लेकर आपस में चर्चा करते देखे गए।
बेल्थरारोड में जीएसटी को लेकर नगर के व्यापारी प्रतिष्ठानों को बंदी का मिलाजुला असर रहा। अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के नगर अध्यक्ष प्रशांत कुमार मंटू के नेतृत्व में व्यापारियों ने दूकानों में तालाबंदी कर जीएसटी को लेकर नाराजगी जताई। दोपहर के बाद अधिकांश दूकानें खुल गई। बंदी का कुछ खास असर नहीं दिखा।
विज्ञापन


जीएसटी पर व्यापारियों की प्रतिक्रिया-
बलिया। जीएसटी को लेकर जहां आमजनता को कुछ समझ में नहीं आ रहा है। वहीं व्यापारियों में इसकों लेकर तरह-तरह के सवाल उठ रहे है। इस मुद्दे पर जब व्यापारियों से बातचीत की गई तो उनके मन की बात जुबां से बाहर निकली। व्यापारियों ने कहा कि बिना किसी ठोस तैयारी के ही आनन-फानन में जीएसटी लागू कर दिया गया।
अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के प्रांतीय उपाध्यक्ष अरविंद गांधी का कहना है कि जीएसटी एक सोची-समझी रणनीति के तहत लागू की गई है। जो केंद्र सरकार के अदूरदर्शिता को दर्शित कर रही है। बताया कि जीएसटी में कहीं-कहीं दोहरेमापदंड अपनाए गए है। जो आमजनता के साथ किए गए वादे के मुताबिक छल से कम नहीं है।
उद्योग व्यापार मंडल के मंडल प्रभारी प्रदीप गुप्ता का कहना है कि व्यापारियों को जेल भेजने तथा प्रापर्टी को सीज करने की व्यवस्था पूर्णत: व्यापारियों के विरोध में है। इसमें व्यापारी हित को देखते हुए संशोधन की जरूरत है।
व्यापार मंडल के जिला मंत्री राजेश कुमार गुप्त ने बताया कि जीएसटी में तमाम खामिया है जहां दवाओं पर कम टैक्स की जरूरत है वहीं खाद्य पदार्थो पर सीमित टैक्स लगाना चाहिए। जबकि गल्ला पर व्यापारियाें को दोहरा टैक्स देना पड़ रहा है।
व्यापार मंडल इलेक्ट्रानिक प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष मनोज राय ने कहा कि जैसे डीजल, पेट्रोल और शराब को जीएसटी से दूर रखा गया है उसी तरह दवाओं पर भी जीएसटी नहीं लगना चाहिए। केंद्र की सरकार ने गल्ला पर पांच फीसदी जीएसटी तथा ढाई फीसदी मंडी टैक्स लगाकर व्यापारियों के साथ खिलवाड़ करने का काम किया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें