बलिया। पंदह ब्लाक के लगभग 200 वर्ष पुराने बरगद को विरासत वृक्ष की छांव मिलेगी। उत्तर प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड की उच्च स्तरीय समिति ने इसे विरासत वृक्ष के रूप में चयनित किया है। जनपद से कुल पांच वृक्षों का प्रस्ताव कमेटी को भेजा गया था। इसमें इसका चयन किया गया है।
अब वन विभाग इस वृक्ष के संरक्षण के लिए शासन की गाइड लाइन के अनुसार कार्य योजना तैयार करेगा। इसके इतिहास को इंटरनेट पर अपलोड किया जाएगा। जनपद के पर्यटन सूची में भी इसे दर्ज किया जाएगा। ताकि पर्यटकों को इसके बारे में जानकारी मिल सके और देखने की उत्सुकता हो सके।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर शासन की ओर से 100 साल या उससे पुराने वृक्षों को विरासत वृक्ष घोषित करने का निर्णय लिया गया था। जनपद से पांच वृक्षों की प्रधान और सचिव ने पूरी रिपोर्ट बनाकर जिला पंचायत राज अधिकारी को सौंपी थी। इसमें बांसडीह के जैदोपुर होरिल ब्रह्मस्थान का वटवृक्ष, सीयर के खैराखास स्थित पीपल का वृक्ष, चिलकहर के कुकरहां स्थित तिलेश्वर भगवान शिव मंदिर के पीपल, सोहांव के कामेश्वर धाम कारों स्थित आम के वृक्ष के साथ बड़सरी का प्रस्ताव भेजा गया था। वन अधिकारी, डीएम और कमिश्नर के माध्यम से इसे बोर्ड को भेजा गया।
बोर्ड की संस्तुति के बाद पंदह ब्लाक के बड़सरी स्थित वृक्ष को चुना गया है। इसकी गोलाई 7.20 मीटर है। शासन से जारी गाइडलाइन के अनुसार जल्द ही शहरी और ग्रामीण इलाकों के अधिकारी वृक्षों को चिह्नित करने के साथ ही संरक्षण के उपाय शुरू करेंगे।
वन क्षेत्र था बड़सरी गांव
खेजुरी। ग्रामीणों के अनुसार पंदह ब्लाक का बड़सरी गांव पहले वन क्षेत्र था। ग्रामीणों के अनुसार ये बरगद का वृक्ष 200 साल से भी पुराना है। बासु तेली नाम के एक संत यहां बरगद की पूजा अर्चना करते थे। इन्हीं के नाम पर गांव का बड़सरी पड़ा। गांव के 80 वर्ष के बुजुर्ग अवधेश सिंह ने बताया कि वृक्ष के पास ही सती मां का स्थान है। यहां गांव के अलावा आसपास के गांव के लोग भी पूजा करते हैं। बीडीसी सदस्य प्रफुल्ल सिंह ने बताया कि ये वृक्ष काफी बढ़ा था। इसकी कई शाखाओं को काट दिया गया। प्राथमिक विद्यालय के निर्माण के समय इसके किनारे चबूतरा बना इसे बचाया गया था।
काटने पर भी रोक
वृक्ष के बाद देखभाल की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों की होगी। वन विभाग और जैव विविधता बोर्ड संरक्षण करेगा। ऐसे वृक्षों को काटा या हटाया नहीं जा सकेगा। आपात स्थिति में शोध संस्थानों की सलाह पर हटाया या काटा जा सकेगा।
शासन की ओर से बड़सरी के वटवृक्ष को हेरिटेज वृक्ष के रूप में चयनित किया गया है। गाइडलाइन के अनुसार इसका संरक्षण और प्रचार-प्रसार किया जाएगा। इसके आसपास पौधरोपण भी किया जाएगा। - श्रद्धा यादव, डीएफओ