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ढाई दशक में मिट गए 36 गांव

Sat, 27 Aug 2016 09:49 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,बलिया
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बाढ़ के पानी में डूबे मकान।
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करीब ढाई दशक में गंगा की उफनाती लहरों ने अब तक तीन दर्जन गांवों का अस्तित्व समाप्त कर दिया। वर्ष 1990 से 2016 तक की बात की जाय गंगा के कटान से 4400 घर नदी में विलीन हो चुके हैं। गांवों के उजड़ने के चलते बैरिया तहसील का नक्शा ही बदल गया है।
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बता दें कि वर्ष 1990 व 1993 में गंगा ने मझौंवा के दो हजार घर, पचरूखिया के 1500 घर को उजाड़ दिया। वहीं वर्ष 1995 में नारायणपुर के तीन सौ घर, 1998 में तेलिया के 100 घर, उपाध्याय टोला के 50 घर को उजाड़ दिया। इसी प्रकार सन् 2003 में दुर्जनपुर के 200 घर, शाहपुर के 300 घर, 2005 व 2007 में रिकनी छपरा के 150 घर, वर्ष 2005 के गंगापुर के आठसौ घर, 2013 में चौबे छपरा का 105 घर, 2016 में चौबे छपरा के 150 घर को।

वहीं बैरिया तहसील के वर्ष 2007 में गंगौली के 300 घर, 2013 में श्रीनगर के छहसौ घर व प्रेमनगर बस्ती के 150 घर। 2016 में चौबे छपरा का 150 परिवार व श्रीनगर का 150 परिवार के साथ ही इन गांवों का नामोनिशान गंगा ने मिटा दिया। जबकि चौबे छपरा में अब दो-चार घर ही केवल बचे हुए हैं। ये सभी लोग जो साधन संपन्न थे, वे बहन के उत्तर दिशा में अपना बसेरा बना लिए तो कई हजारों की संख्या में रामगढ़ से सुघर छपरा तक एनएच 31 पर जीवन जीने को बाध्य है तो कई अपने रिश्तेदारों के यहां शरणास्थली लिए हुए हैं। 
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