बलिया। सूर्योपासना का महापर्व डाला छठ आज से नहाय-खाय के साथ आरंभ होगा। घर की साफ-सफाई के साथ ही नहाय-खाय के साथ महिलाएं व्रत की शुरूआत करेंगी। इस दौरान नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र के गलियों में छठी मइया के गीत गूंजते रहे। चार दिनों तक चलने वाले इस व्रत में शुद्घता व स्वच्छता की विशेष ध्यान रखा जाता है। आज महिलाएं चने की दाल, लौकी की सब्जी और अरवा चावल खाकर पर्व की शुरूआत करेंगी।
रविवार को नहाय-खाय होने के कारण शनिवार को नगर समेत ग्रामीण क्षेत्र के चट्टी चौराहे पर लौकी की काफी मांग रही। रविवार की सुबह स्नान कर व्रती महिलाएं शनिवार की शाम चने की दाल, लौकी की सब्जी व अरवा चावल का भात खाकर पर्व की शुरूआत करेंगी। अगले दिन सोमवार (12 नवंबर) को निर्जला व्रत (खरना) रखकर शाम को गुड़ से बनी बखीर, रोटी व फल से पारण करेंगी।
वहीं 13 नवंबर को षष्ठी तिथि को निर्जला व्रत रहेंगी और शाम को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगी। इसके बाद 14 नवंबर सप्तमी तिथि को उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देकर परिवार के मंगलमय की कामना करते हुए पारण करेंगी। छठ की तैयारी के लिए घरों में महिलाओं ने गेहूं धोना शुरू कर दिया है। इसमें शुद्घता व स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है कि कोई पक्षी अनाज को जूठा न कर दें।