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विद्या भारती संस्कायुक्त शिक्षा के लिए अग्रणी : डोमेश्वर 20-03-04

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बलिया। भारत की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर के साथ-साथ अत्याधुनिक वैज्ञानिक तकनीकी के समन्वय से ही शिक्षा का नवीन प्रारूप निर्मित किया जा सकता है। इससे ही भारत वैश्विक मानवता का मार्गदर्शन कर सकेगा। विद्या भारती इसी परिकल्पना को साकार करने की दिशा में प्रत्यनशील है। यह विचार नागाजी सरस्वती विद्या मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय माल्देपुर में विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश, क्षेत्र द्वारा आयोजित क्षेत्रीय ज्ञान-विज्ञान मेला के उद्घाटन में मुख्य वक्ता के रूप में क्षेत्रीय संगठन मंत्री डोमेश्वर साहू ने व्यक्त किया। दीप प्रज्वलित कर तथा पुष्पार्चन करके मुख्य अतिथि तथा विशिष्ट अतिथियों ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
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समारोह के मुख्य अतिथि प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री उपेंद्र तिवारी ने कहा कि विद्या भारती ने स्वतंत्र भारत की शिक्षा को राष्ट्रीय चरित्र प्रदान किया है। आज विद्या भारती द्वारा निर्मित छात्र-छात्राओं की पीढ़ी विश्वगुरु बनने की ओर बढ़ते भारतीय रथ के मजबूत चक्र सिद्ध हो रही है। उत्कृष्ट वैज्ञानिक प्रगति और संस्कार युक्त शिक्षा के लक्ष्य की प्राप्ति ज्ञान विज्ञान मेला की परंपरा को सरल बनाएगी। विद्या भारती आज पूरे देश में भारतीय संस्कृति से ओत-प्रोत, वर्तमान चुनौतियों का सामना करने वाली अत्याधुनिक शिक्षा के प्रसार में तत्परता से तल्लीन है। कार्यक्रम में अध्यक्षीय भाषण देते हुए सकलदीप राजभर ने कहा कि आज देश व समाज में इस तरह के विद्यालयों की महती आवश्यकता है ताकि शिक्षा के साथ-साथ संस्कार व अनुशासन का भी पाठ पढ़ाया जाता रहे। उन्होंने विद्यालय में रज्जू भैया सभागार (विशाल कक्ष) का शिलान्यास भी किया। अतिथिगण का परिचय व स्वागत स्कूल के प्रधानाचार्य अरविन्द कुमार सिंह चौहान द्वारा किया गया। इस अवसर पर राम मनोहर, आत्मानंद सिंह, अक्षय कुमार ठाकुर, रामजी सिंह, जगदीश सिंह, डा. प्रदीप कुमार श्रीवास्तव आदि रहे। कार्यक्रम का संचालन डा. राजेंद्र पांडेय ने किया। नागाजी के प्रबंधक डा. प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने आगंतुकों के प्रति आभार प्रकट किया।
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