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भरत मिलाप की वृतांत सुनकर श्रद्घालु हुए भावविभोर

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बाबा अमरनाथ मंदिर प्रांगण में चल रहे नौ दिवसीय संगीतमय रामकथा में कथा मर्मज्ञ राजन जी महाराज ने भरत मिलाप का वृत्तांत सुनाया। वृतांत सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
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भरत चले चित्रकूट हो रामा राम को मनाने राम को मनाने सियाराम को मनाने। उन्होंने कहा कि भरत प्रभु श्रीराम से मिलने को इतना व्याकुल हो उठते हैं कि उनके रातों की नींद व दिन का चैन छीन गया था । आखों से अश्रु धारा निकल रही थी , कब बड़े भाई श्रीराम के दर्शन हो । एक एक पल उनके लिए वर्षों समान बीत रहा था । भरत जी जब चित्रकुट के निकट पहुंचते हैं तथा आश्रम में प्रवेश करते ही जब अपने बड़े भाई श्रीराम को देखते हैं तो मानो उनका सारा दुख और कष्ट मिट गया। भगवान राम का बनवास का रूप कमर में मुनियों का वस्त्र बाधे हैं और उसी में तरकस कसे हैं। हाथ में बाण और कंधे पर धनुष है। इसके बाद भरत और राम का मिलाप होता है तथा श्रीराम अपने अनुज भरत को अपनी बाहों में भर लेते हैं। मानों भरत के सीने पर चल रहे बाण शांत हो गए हैं। भरत मिलाप देखकर देवता भी नतमस्तक होते हुए फूलों की वर्षा करने लगे। वहीं दोनों भाइयों के अटूट प्रेम को देख वहां के पत्थर तक पिघल गए। राजन जी महाराज ने बताया कि भाइयों का ऐसा प्यार संसार में कहीं देखने को नहीं मिलता।
वहीं कथा के उपरांत ग्राम सभा मीठा के पूर्व प्रधान भुवनेश्वर सिंह उर्फ नुनु जी ने कथा वाचक श्री राजन जी महाराज व उनके समस्त सहयोगियों को अंगवस्त्रम व माल्यार्पण कर महाराज का आशीर्वाद प्राप्त किया। कथा के दौरान भक्तों की भीड़ को देखते हुए पूरे समय पुलिस प्रशासन व बाबा अमरनाथ सेवा समिति के सदस्य श्रद्धालुयों की सेवा में डटे रहे ।
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