बलिया। शासन की मंशा के अनुरूप कार्य संचालन में पारदर्शिता लाने तथा परिसर की गतिविधियों पर नजर रखने के उद्देश्य से स्थानीय कलेक्ट्रेट परिसर में लाखों की लागत से लगाए गए सीसीटीवी कैमरे शोपीस बने हुए हैं। मेंटीनेंस के अभाव में ये कैमरों कई साल से बेकार साबित हो रहे हैं। इसकी सुधि लेने वाला कोई नहीं हैं।
बताया जाता है कि करीब दस साल पूर्व बसपा के शासन काल में शैंथिल पांड्यन जिलाधिकारी के कार्यकाल के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर में दस से अधिक स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए। कैमरे लगने के बाद उसकी मानीटरिंग भी होती थी। जिलाधिकारी स्वयं अपने कक्ष में मानीटर पर नजर रखते हुए विभागीय कर्मचारियों के कामकाज पर नजर रखते थे। इतना ही नहीं परिसर की गतिविधियों को भी अंदर बैठे ही देख लेते थे। लेकिन उनके तबादले के बाद कुछ माह बाद कैमरे मेंटीनेंस के अभाव में धीरे-धीरे खराब हो गए। वर्तमान में कैमरे सिर्फ शोपीस बने हुए हैं। इस संबंध में जिलाधिकारी भवानी सिंह खगारौत ने बताया कि सीसीटीवी कैमरे लगने से गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है। कलेक्ट्रेट परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरे मेंटीनेंस के अभाव में खराब हो गए हैं, इस जल्द ही दुरुस्त कराया जाएगा।