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25 हजार मतदाताओं के नाम सूची में नहीं हो सके शामिल

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बलिया। अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद भी इसमें हजारों मतदाताओं के नाम शामिल नहीं हो सके हैं। हालांकि इसे कई बार संशोधित किया जा चुका है। यह स्थिति जिले के दोनों नगर पालिका व सभी नगर पंचायतों में है। कयास लगाए जा रहे हैं कि करीब 25 हजार मतदाता आज भी सूची में शामिल होने से वंचित हैं। राज्य निर्वाचन आयोग से लेकर जिला प्रशासन तक गुहार लगाने का भी कोई नतीजा नहीं निकल सका है।
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मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर खामियां सामने आई हैं। प्रशासन भले ही दावा करता हो कि सूची साफ-सुथरी है लेकिन धरातल पर इसे तैयार करने में अधिकारियों व कर्मचारियों की रुचि नहीं रही। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जनसंख्या के सापेक्ष अधिकतम 72 फीसदी मतदाता होने का मानक निर्धारित किया गया है। अधिकारियों ने सारी जिम्मेदारी बीएलओ को देकर कोरम पूरा कर लिया। मतदाता सूची को लेकर अधिकांश कार्य कागजों पर करके जैसे-तैसे सूची को अंतिम रुप दे दिया गया। इतना ही राज्य निर्वाचन आयोग की कार्रवाई से बचने के लिए अधिकारियों व कर्मचारियों ने मनमाने तरीके से नामों को वोटर लिस्ट से गायब कर दिया। आलम यह है कि आज भी हजारों वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची में नहीं हैं। अब जबकि मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 18 अक्तूबर को कर दिया गया है ऐसे में अब सूची में नाम शामलि होने की कोई गुंजाईश नहीं रह गई है। शिकायतों और नाम शामिल कराने वालों की गुहार को भी नजरअंदाज कर दिया।
शिकायतों पर गौर करें तो औसत करीब 10 फीसदी मतदाताओं के नाम सूची में नाम शामिल नहीं हो सके हैं और कुल मिलाकर करीब 25 हजार मतदाता सूची में शामिल होने से वंचित हो गए हैं। बतौर उदाहरण शहर के वार्ड संख्या 16 को देखा जा सकता है। यहां 50 से अधिक ऐसे मतदाताओं का नाम है जो वार्ड के निवासी नहीं हैं। इसके अलावा तीन दर्जन लोगों का नाम सूची में दो स्थानों अंकित किया गया है। जबकि वार्ड के 140 से अधिक मतदाताओं का नाम गायब हैं। इसको लेकर वार्ड के ही निवासी शिवशंकर गुप्ता ने कई बार अधिकारियों के साथ ही राज्य निर्वाचन आयोग और मुख्यमंत्री तक को पत्र देकर गुहार लगाई लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकल सका।
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मतदाता सूची का सत्यापन सबंधित बीएलओ के माध्यम से कराने के बाद ही अंतिम प्रकाशन कराया गया है। मिली आपत्तियों का भी निस्तारण कराया गया है। अब सूची में नाम शामिल करना संभव नहीं है लेकिन विशेष स्थितियों में प्रत्याशी पद के किसी मतदाता का नाम कटा है तो उस पर विचार किया जा सकता है।
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- मनोज सिंघल, अपर जिलाधिकारी

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