बलिया। यूपी बोर्ड हो, सीबीएसई बोर्ड या अन्य प्रतियोगी परीक्षाएं इसमें बच्चों में मानसिक तनाव बढ़ने लगता है। इसको लेकर एक स्कूल में मनोचिकित्सक एवं परमार्शदाताओं द्वारा बच्चों का परीक्षण किया गया। जिसमें पढ़ाई का बोझ, कामयाबी होने का दबाव और बच्चों से उनका बचपन छीनने का मामला प्रकाश में आया।
जमुआ गांव स्थित एक प्राइवेट स्कूल ने बच्चों की मानसिक स्थिति को जानने के लिए मनोचिकित्सक एवं परमार्शदाताओं से छात्रों की जांच कराई। जिसमें बच्चों पर पढ़ाई का बोझ, अभिभावक के सपनों को पूरा करने का दबाव और बच्चों से उनका बचपन छीनने का मामला प्रकाश में आया। परामर्शदाता पूजा भट्ट ने बताया कि जांच में पाया गया कि कुछ ख़ास विषयों का दबाव उन्हें परेशान करता है। इसके अलावा वर्तमान शिक्षा पद्धति में बच्चों पर किताब का बोझ हद से ज्यादा बढ़ चुका है। ऐसे में अभिभावकों के सपनों को पूरा करने का दबाव बच्चों पर मानसिक तनाव का कारण बन रहा है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि बच्चों की समस्याओं का निदान कैसे किया जाय। इसके लिए स्कूल व अभिभावक दोनों को जिम्मेदारी उठानी होगी। जिससे बच्चों में बढ़ रहे मानसिक तनाव को दूर किया जा सके। इसके लिए बच्चों का बोझ कम करना होगा। खेल-खेल में पढ़ाना, बच्चों को कैरियर बनाने के लिए दबाव के बजाय प्रेरित करना, खेलकूद के लिए छूट देना, छोटे बच्चों को मोबाइल से दूर रखना आदि शामिल है।