बलिया। पिछले एक पखवारे से जिले में यूरिया को लेकर मचे हाहाकार पर कुछ हद तक लगाम लगेगी। जिले में मंगलवार को 3145 मी. टन यूरिया की खेप पहुंची। किसानों की मांग को देखते हुए अधिकारियों के निर्देश पर यूरिया को रेक से सीधे समितियों पर भेजने का काम शुरू हो गया। इससे किसानों को राहत मिलेगी। अमर उजाला ने 08 जनवरी के अंक में इस समस्या को प्रकाशित किया था, जिसके बाद महकमा सक्रिय हुआ और जिले में खाद की बड़ी खेप पहुंच गई।
आमतौर पर रबी फसलों की बुआई दिसंबर में हो जाती है। बुआई के बाद 21 से 25 दिनों के अंतराल पर सिंचाई के बाद गेहूं की फसल को स्वस्थ रखने व पैदावार सही प्राप्त करने के लिए यूरिया की जरूरत पड़ती है। लेकिन पिछले एक पखवारे से जिले के किसी भी सहकारी समिति पर यूरिया नहीं होने के कारण किसान परेशान थे और इस कमी का फायद प्राइवेट दुकानदार भी उठा रहे थे। अधिकांश इलाकों में कालाबाजारी दर पर यूरिया मिलने से किसान परेशान थे। उधर, कृषि विभाग के अधिकारियों का दावा था कि जिले के लिए निर्धारित 34 हजार मी.टन के सापेक्ष अब तक केवल 15 हजार मी. टन यूरिया ही मिली और इसके चलते ही इस तरह की परेशानी आई है। कृषि अधिकारी ने बताया था कि रैक आने वाली है जो मंगलवार को 3145 मी. टन यूरिया लेकर रेलवे स्टेशन पर पहुंची। किसानों की मांग को देखते हुए अधिकारियों यूरिया को बफर गोदाम के बजाए सीधे सहकारी समितियों पर भिजवाना शुरू कर दिया। अब उम्मीद है कि किसानों को यूरिया के भटकना नहीं पड़ेगा।
जिला कृषि अधिकारी विकेश कुमार ने बताया कि रैक से जिले में मंगलवार को 3145 मी.टन यूरिया की खेप पहुंची है। अधिकांश इलाकों में यूरिया के लिए किसान परेशान हैं, इसको देखते हुए यूरिया को रैक से सीधे सहकारी समितियों को भिजवाया जा रहा है।