बलिया। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के स्वप्न ग्राम स्वराज के लक्ष्य को 73 वें संवैधानिक संशोधन से 24 अप्रैल 1993 को संवैधानिक स्वरूप प्रदान किया गया। लेकिन दु:ख की बात है कि आज ग्राम स्वराज का लक्ष्य भटकर कर प्रधान राज या भ्रष्ट राज की तरफ उन्मुख हो गया है। इसकी शिकायत जिलाधिकारी सहित अन्य अफसरों से बार-बार किए जाने के बाद भी ग्रामसभा की बैठक वर्ष में दो बार नहीं बुलाई जाती। यह बातें सामाजिक चिंतक सुधांशु शेखर त्रिपाठी ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान लोक निर्माण विभाग के डाक बंगले में कही।
उन्होंने कहा कि बैठक का कोरम अगर पूरा नहीं होता है तो दुबारा बैठक बुलानी चाहिए। बैठक में ग्राम प्रधानों को पिछले वर्ष की कार्यवाही तथा सभी खातों का हिसाब, विकास कार्यक्रमों का लेखाजोखा ग्रामसभा के समक्ष रखा जाना चाहिए। जबकि गांव में कागजों पर ही खुली बैठक हो जाती है। खुली बैठक के लिए सोहांव के खंड विकास अधिकारी ने सभी ग्रामों के सचिवों को निर्देश भी दिया। बावजूद इसके खुली बैठकें नहीं कराई गई। अगर शासन-प्रशासन स्तर से ठोस कार्रवाई नहीं की जाती है तो हम जनहित याचिका दाखिल करने के लिए विवश होंगे। इस मौके पर राजेश् कुमार उपाध्याय, पवन कुमार, अखिलेश राय, भरत सिंह यादव , राहुल पांडेय आदि मौजूद रहे।