बलिया। अवरोध एवं बांधविहीन गंगा ही अपनी निर्मलता को प्रमाणित कर पाएगी। नदी को प्रदूषित करने पर दंडित किए जाने की परंपरा की प्रासंगिकता को चरितार्थ करने के लिए जरूरी है कि इसके लिए प्रशासनिक जवाबदेही तय की जाय। उक्त बातें गंगा मुक्ति एवं प्रदूषण विरोधी अभियान के राष्ट्रीय प्रभारी रमाशंकर तिवारी ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा पतित पावनी गंगा के संदर्भ में दिए गए निर्देश के क्रम में शुक्रवार को पत्रकारों से कहीं।
कहा कि 20 हजार करोड़ खर्च करने के पश्चात भी गंगा प्रदूषण का बना रहना सरकार की विफलता का प्रतीक है। कहा गंगा प्रदूषण के लिए लोग के साथ-साथ कहीं उद्योग ज्यादे जिम्मेदार है। अधिकरण द्वारा अब और अधिक आगे खर्च नहीं करने के निर्देश से सरकार की नमामि गंगे योजना पर सवालिया निशान लग रहा है।