बलिया। योगी सरकार के भ्रष्टाचारमुक्त प्रदेश बनाने का दावा फिलहाल जिले में फेल होता दिख रहा है। पीएम आवास योजना भी पूरी तरह भ्रष्टाचार का शिकार हो चुकी है और इसके आवंटन में भी धांधली की जा रही है। कागजों पर खुली बैठक कर आवास आवंटन का काम किया जा रहा है और आवास के नाम पर वसूली करने की शिकायत पर भी अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं करते।
सरकारी योजनाओं के लागू करने को लेकर अधिकारियों व कर्मचारियों की ओर से किस कदर लापरवाही व सुस्ती बरती जाती है इसका अंदाजा प्रधानमंत्री आवास योजना को देखकर लगाया जा सकता है। वर्ष 2016-17 में भारत सरकार की ओर से इंदिरा आवास योजना के स्थान पर प्रधानमंत्री आवास योजना का संचालन किया। लाभार्थियों के चयन के लिए सरकार की ओर ने मानक का निर्धारण भी किया गया और जिले के लिए कुल 6079 आवास का लक्ष्य निर्धारित किया। हालांकि आवास का लक्ष्य जिले में काफी विलंब से आया और चयन व लाभार्थियों के भुगतान की प्रक्रिया चल रही थी कि विधानसभा चुनाव को लेकर आचार संहिता लागू हो गई और आवास से संबंधित प्रक्रिया ठप हो गई। आचार संहिता समाप्त होते ही शासन की ओर से आवास का लक्ष्य बढ़ाकर 10 हजार 455 कर दिया गया। हालांकि बाद में इसमें एक बार संशोधन कर आवास का लक्ष्य 9810 कर दिया गया। शासन की ओर से सेक डाटा से लाभार्थियों की सूची बीडीओ की लॉगिन पर उपलब्ध कराकर उसे खुली बैठक में पात्रता तय करने का निर्देश दिया गया है। लेकिन अभी तक किसी गांव में खुली बैठक नहीं कराई गई है और अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से कागजों पर ही बैठक दिखाकर आवास आवंटन करने का ‘खेल’ बदस्तूर जारी है। बताया जाता है शासन की ओर से उपलब्ध कराई सूची में अपात्रों के नामों को काटकर उसके स्थान पर अगले क्रम के लाभार्थी को चयन करने का निर्देश है लेकिन ऐसा नहीं कर अपात्रों को आवास का आवंटन किया जाता है। अधिकांश गांवों के लोगों ने सीडीओ व उच्चाधिकारियों को शिकायती पत्र देकर सचिवों पर मनमानी व सुविधा शुल्क मांगने का आरोप लगाया है। लेकिन किसी भी शिकायती पत्र पर अभी तक कार्रवाई नहीं सकी है। बतौर उदाहरण सोहांव ब्लाक के भरौली निवासी महावीर पासवान आदि ने डेढ़ माह पहले सीडीओ को शिकायती पत्र दिया लेकिन यह अभी भी ठंडे बस्ते में है।
पीएम आवास के आवंटन की जिम्मेदारी पूरी तरह ब्लाककर्मियों की है। कई गांवों में जांच में गड़बड़ी मिली और कार्रवाई भी की गई है। कुछ शिकायतें मिली हैं जिसे जांच के लिए संबंधित ब्लाकों को भेजा गया है। - संतोष कुमार, सीडीओ, बलिया